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​इस्लामाबाद बना ‘डिप्लोमैटिक किला’: अमेरिकी-ईरानी डेलिगेशन की सुरक्षा को लेकर तेहरान से वॉशिंगटन तक हाई अलर्ट

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली ऐतिहासिक शांति वार्ता को लेकर पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान पर टिकी हैं। सुरक्षा इतनी कड़ी है कि पूरी राजधानी एक ‘नो-गो जोन’ में तब्दील हो गई है।

​इस्लामाबाद बना ‘डिप्लोमैटिक किला’: अमेरिकी-ईरानी डेलिगेशन की सुरक्षा को लेकर तेहरान से वॉशिंगटन तक हाई अलर्ट

​इस्लामाबाद। मध्य-पूर्व में जारी भीषण तनाव के बीच, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इस वक्त दुनिया का सबसे संवेदनशील केंद्र बनी हुई है। शनिवार से शुरू होने वाली अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के लिए दोनों देशों के उच्चस्तरीय डेलिगेशन पहुँच रहे हैं। हालांकि, पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति और क्षेत्रीय अस्थिरता को देखते हुए वॉशिंगटन और तेहरान, दोनों ही अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं।

​VVIP सुरक्षा का अभूतपूर्व घेरा

​पाकिस्तानी गृह मंत्रालय ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी डेलिगेशन के लिए ‘ब्लू बुक’ (VVIP) सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किया है। सुरक्षा के इंतजाम कुछ इस प्रकार हैं:

​सेरेना होटल बना ‘छावनी’: वार्ता का मुख्य केंद्र ‘इस्लामाबाद सेरेना होटल’ पूरी तरह से खाली करा लिया गया है। आम मेहमानों को रविवार तक होटल छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। पूरे होटल को सरकार ने अपने नियंत्रण में ले लिया है।

​रेड जोन सील: संसद भवन और डिप्लोमैटिक एन्क्लेव की ओर जाने वाले सभी रास्तों को 3 किलोमीटर पहले ही सील कर दिया गया है।

​30 सदस्यीय अमेरिकी एडवांस टीम: सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए 30 सदस्यीय अमेरिकी सुरक्षा विशेषज्ञों की टीम पहले ही इस्लामाबाद पहुँच चुकी है।

​दो दिन का सरकारी अवकाश और लॉकडाउन

​सुरक्षा जोखिमों को कम करने और डेलिगेशन के मूवमेंट को सुगम बनाने के लिए इस्लामाबाद और रावलपिंडी में 9 और 10 अप्रैल को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। स्कूल, कॉलेज और बाज़ार बंद रखे गए हैं ताकि सड़कों पर भीड़ कम रहे और सुरक्षा एजेंसियां हर गतिविधि पर पैनी नजर रख सकें।

​क्यों है ‘तेहरान से वॉशिंगटन’ तक चिंता?

​राजनयिक गलियारों में यह डर बना हुआ है कि कोई भी छोटी सी सुरक्षा चूक न केवल वार्ता को विफल कर देगी, बल्कि पूरे क्षेत्र में युद्ध की आग भड़का सकती है।

​ईरान की चिंता: इजरायली सैन्य गतिविधियों और हालिया तनाव के बीच ईरान अपने वरिष्ठ अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क है।

​अमेरिका की चिंता: अमेरिका को डर है कि क्षेत्र में सक्रिय चरमपंथी गुट इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं।

​इन दिग्गजों पर टिकी है दुनिया की नजर

​इस वार्ता में शामिल होने के लिए अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के आने की चर्चा है। वहीं, ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कलीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची डेलिगेशन का नेतृत्व कर रहे हैं।

​निष्कर्ष: पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने आश्वासन दिया है कि सुरक्षा ‘फूलप्रूफ’ है। पाकिस्तान के लिए यह बैठक केवल एक वार्ता नहीं, बल्कि उसकी अंतरराष्ट्रीय साख और सुरक्षा क्षमता की सबसे बड़ी परीक्षा है।

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