ईरान ने दे दी इजरायल पर मिसाइल हमले की धमकी, संघर्षविराम के कुछ घंटों में क्यों भड़क उठा
ईरान ने दे दी इजरायल पर मिसाइल हमले की धमकी, संघर्षविराम के कुछ घंटों में क्यों भड़क उठा
दो हफ्ते के अस्थायी संघर्षविराम (Islamabad Accord) घोषित होने के कुछ घंटों के अंदर ही ईरान ने इजरायल को कड़ी धमकी दे दी है। ईरान का कहना है कि अगर इजरायल दक्षिणी लेबनान में हमले नहीं रोकता, तो वह तेल अवीव समेत इजरायली शहरों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल हमले शुरू कर देगा।
यह धमकी ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की ओर से आई है। IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने भी चेतावनी दी कि “हमारे हाथ ट्रिगर पर हैं” और कोई भी गलती पर “पूर्ण जवाब” दिया जाएगा।
क्यों भड़क उठा ईरान? इनसाइड स्टोरी
संघर्षविराम की मुख्य शर्तें अमेरिका-ईरान के बीच थीं — ईरान होर्मुज स्ट्रेट खोलेगा और अमेरिका-इजरायल ईरान पर हमले रोकेंगे। लेकिन:
इजरायल ने साफ कहा: यह सीजफायर लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ उसके अभियान पर लागू नहीं होता। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि लेबनान मोर्चा अलग है और हमले जारी रहेंगे।
ईरान इसे धोखा मान रहा है। उसका दावा है कि अमेरिका-इजरायल ने सीजफायर का फायदा उठाकर लेबनान में हिजबुल्लाह पर दबाव बढ़ाया है।
सीजफायर घोषणा के तुरंत बाद ही इजरायल ने ईरान के कुछ लक्ष्यों पर हवाई हमले जारी रखे या नए स्ट्राइक्स किए (ईरानी मीडिया के अनुसार)।
इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए — इजरायल, UAE, कुवैत, बहरीन और सऊदी अरब में मिसाइल अलर्ट जारी हुए। कुछ बैराज को इजरायली एयर डिफेंस ने इंटरसेप्ट किया।
ईरान की नजर में लेबनान “एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस” का हिस्सा है। हिजबुल्लाह पर हमले को वह अपने खिलाफ अप्रत्यक्ष हमला मान रहा है। इसलिए उसने कहा — “लेबनान में गोलीबारी रुकी नहीं तो तेल अवीव जल जाएगा”।
क्या हुआ संघर्षविराम के बाद?
मिसाइल अलर्ट: इजरायल में कई जगह सायरन बजे। UAE और कुवैत में भी ड्रोन-मिसाइल थ्रेट रिपोर्ट हुए।
ईरान में भी हमले: ईरान के लावान आइलैंड पर ऑयल रिफाइनरी में धमाके की खबरें आईं (ईरानी मीडिया का दावा — इजरायली हमला)।
दोनों पक्षों का दावा:
ईरान — “यह युद्ध का अंत नहीं, सिर्फ ठहराव है। हम ट्रिगर पर हाथ रखे हुए हैं।”
इजरायल — “लेबनान अलग मुद्दा है, हम अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई जारी रखेंगे।”
अमेरिका — ट्रंप ने इसे “विक्ट्री” बताया, लेकिन कहा कि अगर ईरान ने होर्मुज ठीक से नहीं खोला तो दोबारा हमले हो सकते हैं।
आगे क्या?
यह सीजफायर बेहद नाजुक है। इस्लामाबाद में 10 अप्रैल से शुरू होने वाली बातचीत में लेबनान मुद्दा बड़ा पेंच साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इजरायल लेबनान में अभियान तेज करता रहा तो ईरान अपना वादा पूरा कर सकता है, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में आग फिर भड़क सकती है।
अभी की स्थिति (8 अप्रैल 2026 शाम): होर्मुज में शिपिंग धीरे-धीरे शुरू हो रही है, लेकिन टोल फीस का विवाद बरकरार है। इजरायल-लेबनान मोर्चे पर तनाव कम नहीं हुआ। दुनिया भर के नेता स्थायी शांति की अपील कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अभी अलग कहानी बता रही है।
यह घटनाक्रम दिखाता है कि 40 दिनों से चल रहे इस युद्ध में ट्रस्ट की भारी कमी है। एक छोटी सी चिंगारी फिर से बड़े संघर्ष को भड़का सकती है। आगे की डेवलपमेंट्स पर नजर बनाए रखें।
