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अंतरिक्ष से आई ऐतिहासिक तस्वीर: चांद की ओट में छिपी ‘नाजुक’ पृथ्वी, आर्टेमिस-2 के जांबाजों ने रचा इतिहास

अंतरिक्ष से आई ऐतिहासिक तस्वीर: चांद की ओट में छिपी ‘नाजुक’ पृथ्वी, आर्टेमिस-2 के जांबाजों ने रचा इतिहास

​ह्यूस्टन (टेक्सास): चांद का चक्कर लगाकर धरती की ओर लौट रहे आर्टेमिस-2 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने एक ऐसी तस्वीर साझा की है, जिसने पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर दिया है. यह तस्वीर है ‘अर्थसेट’ (Earthset) की, जिसमें हमारा नीला ग्रह चंद्रमा के पथरीले और ऊबड़-खाबड़ क्षितिज के पीछे धीरे-धीरे डूबता हुआ दिखाई दे रहा है.

​यह दृश्य ठीक वैसा ही है जैसे हम धरती से सूर्यास्त देखते हैं, लेकिन अंतरिक्ष की गहराई में यह नजारा कहीं अधिक भावुक और विस्मयकारी है.

​’अर्थराइज’ की यादें हुईं ताजा

​यह ऐतिहासिक तस्वीर दिसंबर 1968 के मशहूर ‘अर्थराइज’ (Earthrise) फोटो की याद दिलाती है, जिसे अपोलो-8 मिशन के दौरान लिया गया था. तब उस तस्वीर ने मानवता को पहली बार यह एहसास कराया था कि ब्रह्मांड के इस विशाल अंधेरे में हमारी पृथ्वी कितनी सुंदर और नाजुक है. अब, 57 साल बाद नासा और व्हाइट हाउस द्वारा जारी इस आधुनिक तस्वीर ने एक बार फिर अंतरिक्ष की अनंत गहराई और चंद्रमा की सतह के बीच पृथ्वी के अद्भुत संगम को जीवंत कर दिया है.

​नासा कंट्रोल रूम में जश्न का माहौल

​मंगलवार को जब मिशन के चारों अंतरिक्ष यात्री—रीड वाइसमैन, क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर और जेरेमी हैनसेन—वापसी की राह पर थे, तब उन्होंने मिशन कंट्रोल के साथ अपने अनुभव साझा किए. करीब सात घंटे तक चंद्रमा का बारीकी से अध्ययन करने के दौरान क्रू ने जो देखा, उसने वैज्ञानिकों को झूमने पर मजबूर कर दिया.

​उल्कापिंडों की चमक: अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद की सतह पर उल्कापिंडों के टकराने से होने वाले ‘फ्लैश’ को अपनी आंखों से देखा.

​दुर्लभ सूर्य ग्रहण: टीम अंतरिक्ष से एक दुर्लभ सूर्य ग्रहण की गवाह बनी, जहां चंद्रमा ने सूर्य को पूरी तरह ढक लिया था.

​विक्टर ग्लोवर का बयान: भावुक होते हुए विक्टर ने कहा, “शायद इंसानी आंखें वह सब देखने के लिए विकसित ही नहीं हुई हैं, जो हम देख रहे हैं. इसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है.”

​टूटा 56 साल पुराना रिकॉर्ड

​आर्टेमिस-2 मिशन ने न केवल तस्वीरें लीं, बल्कि इतिहास की किताबों में भी अपना नाम दर्ज करा लिया. इस टीम ने अपोलो-13 (1970) द्वारा बनाए गए ‘पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी’ के रिकॉर्ड को 6,000 किलोमीटर से अधिक के अंतर से तोड़ दिया है.

​अधिकतम दूरी: ओरियन कैप्सूल पृथ्वी से 4,06,771 किलोमीटर की दूरी तक पहुंचा, जो अब तक किसी भी मानवयुक्त यान के लिए सबसे लंबी दूरी है.

​शुक्रवार को समुद्र में ‘स्प्लैशडाउन’ का इंतजार

​फिलहाल ओरियन कैप्सूल ‘फ्री-रिटर्न प्रक्षेपवक्र’ (Free-return trajectory) के जरिए सुरक्षित रूप से धरती की ओर बढ़ रहा है. अब पूरी दुनिया को शुक्रवार (10 अप्रैल, 2026) का इंतजार है, जब यह कैप्सूल कैलिफोर्निया के तट के पास प्रशांत महासागर में लैंड (स्प्लैशडाउन) करेगा.

​नासा प्रमुख के अनुसार, रिकवरी जहाज पहले ही बंदरगाह से रवाना हो चुका है. यह मिशन 2028 में होने वाली अगली मून लैंडिंग (Artemis III) की मजबूत नींव रख रहा है, जब इंसान एक बार फिर चांद की जमीन पर अपने कदम रखेगा.

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