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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: 14 अप्रैल को PM मोदी करेंगे उद्घाटन, नाम को लेकर उठी नई मांग

यह दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 14 अप्रैल को इसके उद्घाटन की घोषणा के साथ ही अब इसके नामकरण को लेकर सियासत और चर्चाएं दोनों गरमा गई हैं।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: 14 अप्रैल को PM मोदी करेंगे उद्घाटन, नाम को लेकर उठी नई मांग

दिल्ली और उत्तराखंड के बीच की दूरी को समेटने वाला बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे (NH-72A) जल्द ही शुरू होने जा रहा है। 14 अप्रैल को इसके उद्घाटन की तारीख तय की गई है, जिससे न केवल सफर का समय आधा रह जाएगा, बल्कि इस दिन का विशेष महत्व होने के कारण इसके नाम को लेकर एक नई चर्चा शुरू हो गई है।

1. सांसद चंद्र शेखर आजाद की मांग: ‘बाबा साहेब’ के नाम पर हो नामकरण

नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्र शेखर आजाद ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर एक बड़ा प्रस्ताव दिया है।

* प्रस्ताव: एक्सप्रेसवे का नाम ‘बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर एक्सप्रेसवे’ रखने का अनुरोध।

* तर्क: 14 अप्रैल को बाबा साहेब की जयंती भी है। सांसद ने पत्र में लिखा कि यह नाम आधुनिक भारत के शिल्पकार और शोषितों के मसीहा के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगा और बहुजन समाज के लिए गर्व का विषय होगा।

2. सफर में भारी कमी: 5 घंटे का रास्ता अब 2.5 घंटे में

इस एक्सप्रेसवे के खुलने के बाद दिल्ली (अक्षरधाम) से देहरादून के बीच का सफर ऐतिहासिक रूप से सुगम हो जाएगा।

* दूरी: लगभग 213 किलोमीटर।

* समय: वर्तमान में लगने वाले 5-6 घंटे के बजाय अब मात्र 2.5 से 3 घंटे का समय लगेगा।

* लागत: इस प्रोजेक्ट के निर्माण में करीब 12,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

3. एक्सप्रेसवे की तकनीकी और खास विशेषताएं

यह एक्सप्रेसवे अपनी बनावट और पर्यावरण संतुलन के लिए दुनिया भर में चर्चा बटोर रहा है:

* एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर: राजाजी नेशनल पार्क के ऊपर 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है। यह एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड वन्यजीव गलियारा है।

* वन्यजीवों की सुरक्षा: इस एलिवेटेड डिजाइन की वजह से एक्सप्रेसवे के नीचे वन्यजीव बिना किसी डर या दुर्घटना के खतरे के आसानी से घूम सकेंगे।

* 6 लेन ग्रीनफील्ड हाईवे: यह पूरी तरह से नया (Greenfield) रास्ता है जो गाजियाबाद, बागपत, शामली और सहारनपुर के रास्ते मोहंड होते हुए देहरादून पहुंचेगा।

4. उद्घाटन की तैयारी और देरी का जिक्र

सांसद चंद्र शेखर आजाद ने अपने पत्र में यह भी रेखांकित किया कि यह प्रोजेक्ट 2023-24 तक पूरा होना था, लेकिन तकनीकी कारणों से इसमें करीब दो साल की देरी हुई। अब 14 अप्रैल को लोकार्पण के बाद यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के आर्थिक विकास के लिए ‘इकोनॉमिक कॉरिडोर’ का काम करेगा।

निष्कर्ष

फिलहाल सरकार की ओर से नाम बदलने या अधिकारिक नामकरण को लेकर कोई पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन 14 अप्रैल को उद्घाटन के दिन डॉ. अंबेडकर की जयंती होने के कारण इस मांग ने जोर पकड़ लिया है। अब सबकी नजरें केंद्र सरकार और नितिन गडकरी के जवाब पर टिकी हैं।

 

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