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ईरान में फंसे अमेरिकी पायलट का ‘मिरेकल’ रेस्क्यू: राष्ट्रपति ट्रंप ने किया पूरी सैन्य कार्रवाई का खुलासा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में फंसे एक अमेरिकी पायलट को सुरक्षित निकालने के लिए चलाए गए बेहद जटिल और विशाल ‘रेस्क्यू ऑपरेशन’ की विस्तृत जानकारी साझा की है।

ईरान में फंसे अमेरिकी पायलट का ‘मिरेकल’ रेस्क्यू: राष्ट्रपति ट्रंप ने किया पूरी सैन्य कार्रवाई का खुलासा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के भीतर घुसकर एक घायल अमेरिकी पायलट को बचाने के मिशन की सफलता पर आधिकारिक बयान जारी किया है। ट्रंप ने इस ऑपरेशन को “अद्भुत और असाधारण” करार देते हुए बताया कि किस तरह अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के रडार और सेना को चकमा देकर इस मिशन को अंजाम दिया।

1. रेस्क्यू मिशन का विशाल पैमाना: 170 से ज्यादा विमान तैनात

राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, यह कोई साधारण बचाव अभियान नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे ऑपरेशन में कुल 170 से अधिक सैन्य विमान शामिल थे।

* पहला चरण: पहले क्रू सदस्य को निकालने के लिए 21 विमानों का उपयोग किया गया।

* दूसरा चरण (मुख्य मिशन): दूसरे बचाव अभियान में 155 विमान शामिल थे।

* विमानों का विवरण: इन 155 विमानों में 4 बॉम्बर (Bombers), 64 फाइटर जेट्स, 48 रिफ्यूलिंग टैंकर और 13 विशेष रेस्क्यू एयरक्राफ्ट शामिल थे।

2. ‘धोखा और चालबाजी’ (Tactical Deception) की रणनीति

ट्रंप ने खुलासा किया कि ईरान की भारी सैन्य मौजूदगी और IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के हजारों सैनिकों को भ्रमित करने के लिए अमेरिका ने ‘चालबाजी’ का सहारा लिया।

“हमने पूरे इलाके में अपने विमानों को इस तरह फैला दिया कि ईरानी सेना पूरी तरह भ्रमित हो गई। वे समझ नहीं पा रहे थे कि हम वास्तव में कहाँ हैं। उन्हें लगा कि हम उनके सिर पर हैं, जबकि हमारा फोकस पायलट वाली लोकेशन पर था।”

3. पायलट की बहादुरी और आधुनिक तकनीक

पायलट के घायल होने के बावजूद उसकी हिम्मत की प्रशंसा करते हुए ट्रंप ने बताया:

* ट्रेनिंग का पालन: विमान गिरने के बाद पायलट ने अपनी ट्रेनिंग का पालन किया और दुश्मन की पहुंच से बचने के लिए क्रैश साइट से बहुत दूर पहाड़ों की ऊंचाई पर चढ़ गया।

* आधुनिक बीपर: पायलट के पास एक अत्याधुनिक बीपर डिवाइस था, जिसकी बैटरी और सिग्नल ने चमत्कारिक रूप से काम किया। इसी डिवाइस के जरिए पायलट ने अमेरिकी सेना से संपर्क साधा और अपनी सटीक लोकेशन भेजी।

* स्वयं का उपचार: गंभीर रूप से घायल होने और खून बहने के बावजूद, पायलट ने चट्टानों पर चढ़ते हुए खुद अपना प्राथमिक उपचार किया।

4. मिशन के दौरान आई चुनौतियां

ऑपरेशन के दौरान कुछ तकनीकी मुश्किलें भी आईं। ट्रंप ने बताया कि दो ट्रांसपोर्ट विमान रेत में फंस गए थे, जिन्हें मिशन की सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने के लिए वहीं नष्ट करना (उड़ाना) पड़ा। ईरान ने पायलट को पकड़ने के लिए स्थानीय समुदायों को बड़े इनाम का लालच भी दिया था, लेकिन अमेरिकी सेना समय रहते वहां पहुंच गई।

5. सूचना लीक होने पर ट्रंप सख्त: रिपोर्टर को जेल की चेतावनी

इस पूरे ऑपरेशन की सबसे बड़ी अपडेट यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप मिशन की खबरें समय से पहले लीक होने पर बेहद नाराज हैं। उन्होंने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा:

* वह उस रिपोर्टर से अपने ‘सोर्स’ (स्रोत) का खुलासा करने की मांग करेंगे जिसने सबसे पहले इस रेस्क्यू की खबर लीक की थी।

* ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि रिपोर्टर ने अपना सोर्स नहीं बताया, तो उन्हें जेल भेजा जा सकता है, क्योंकि ऐसी जानकारी लीक करना राष्ट्रीय सुरक्षा और सैनिकों की जान के लिए खतरा पैदा करता है।

निष्कर्ष

यह ऑपरेशन आधुनिक सैन्य इतिहास के सबसे बड़े बचाव अभियानों में से एक बनकर उभरा है। जहाँ एक तरफ अमेरिकी तकनीकी श्रेष्ठता और सामरिक कौशल (Tactical Skills) की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति ट्रंप के कड़े तेवरों ने प्रेस की आजादी और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच की बहस को भी तेज कर दिया है।

 

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