उत्तराखंड कांग्रेस में ‘अवकाश’ पर रार: यशपाल आर्या की हरीश रावत से मुलाकात और गहराता सियासी संकट
उत्तराखंड कांग्रेस में मचे सियासी घमासान और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के ‘राजनीतिक अवकाश’ ने राज्य की राजनीति में गर्मी पैदा कर दी है। आज की ताजा मुलाकातों और पिछले घटनाक्रमों को मिलाकर पूरी स्थिति का विश्लेषण यहाँ दिया गया है:
उत्तराखंड कांग्रेस में ‘अवकाश’ पर रार: यशपाल आर्या की हरीश रावत से मुलाकात और गहराता सियासी संकट
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत का 15 दिवसीय राजनीतिक अवकाश पार्टी के भीतर एक बड़े तूफान का संकेत दे रहा है। एक ओर जहां रावत समर्थकों में भारी नाराजगी है, वहीं दूसरी ओर दिग्गजों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
1. ताजा घटनाक्रम: यशपाल आर्या और हरीश रावत की मुलाकात
आज सोमवार, 6 अप्रैल को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या ने हरीश रावत के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की।
* मुलाकात का संदेश: हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर इसे ‘स्नेहपूर्ण आगमन’ बताते हुए कहा कि प्रदेश के समसामयिक विषयों और जनहित के मुद्दों पर सार्थक संवाद हुआ।
* अहमियत: राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को डैमेज कंट्रोल की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि रावत 27 मार्च से ही मुख्यधारा की राजनीति से दूर हैं।
2. नाराजगी की असली वजह: ‘संजय नेगी’ प्रकरण?
चर्चा है कि हरीश रावत की नाराजगी की जड़ रामनगर के नेता संजय नेगी को पार्टी में शामिल न किया जाना है।
* रावत चाहते थे कि नेगी की घर वापसी हो, लेकिन हाईकमान या पार्टी के अन्य गुटों की मंजूरी न मिलने के कारण उन्होंने 15 दिन के ‘राजनीतिक अवकाश’ की घोषणा कर दी।
* पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने खुलकर कहा कि रावत जैसे दिग्गज को दरकिनार कर उत्तराखंड में कांग्रेस की जीत संभव नहीं है।
3. दिग्गजों की जुबानी जंग: हरक बनाम धामी
हरीश रावत के अवकाश पर पार्टी के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है:
| नेता | रुख/बयान |
| हरक सिंह रावत | तीखा तंज कसते हुए कहा कि किसी को यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि उसके बिना पार्टी नहीं जीत सकती। उन्होंने चुटकी ली कि रावत को अब केवल पीएम पद मिलना ही बाकी रह गया है। |
| हरीश धामी | हरक के बयान पर भड़क गए और रावत समर्थकों से सामूहिक इस्तीफे का आह्वान कर दिया, जिससे पार्टी में हड़कंप मच गया। |
| गणेश गोदियाल | प्रदेश अध्यक्ष इस पूरे संकट और अंतर्कलह पर रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए हैं, जिस पर सवाल उठ रहे हैं। |
4. अटकलों का बाजार: भाजपा से नजदीकी?
इसी बीच कैबिनेट मंत्री खजान दास की हरीश रावत से मुलाकात ने सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी।
* अटकलें: चर्चा चली कि रावत भाजपा का दामन थाम सकते हैं।
* सफाई: कांग्रेस प्रवक्ताओं ने इसे महज ‘शिष्टाचार भेंट’ बताया, लेकिन 2027 के चुनावों से पहले इस मुलाकात ने कांग्रेस की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
निष्कर्ष: 2027 की राह में कांटे
कांग्रेस के लिए यह संकट ऐसे समय में आया है जब उसे एकजुट होकर सत्ता पक्ष को घेरना चाहिए। हरीश रावत की नाराजगी और हरक सिंह रावत के तीखे बयानों ने पार्टी के भीतर की दरार को सार्वजनिक कर दिया है। अब सबकी नजरें इस पर हैं कि 15 दिन का यह अवकाश समाप्त होने के बाद ‘दाद’ (हरीश रावत) का अगला कदम क्या होगा।
