पेमा खांडू को SC से झटका: ₹1,270 करोड़ के सरकारी ठेकों की होगी CBI जांच
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेके देने के मामले में CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) को प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry) के आदेश दिए हैं।
पेमा खांडू को SC से झटका: ₹1,270 करोड़ के सरकारी ठेकों की होगी CBI जांच
उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने आज अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और उनके परिवार के सदस्यों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह उन आरोपों की जांच करे, जिनमें खांडू पर मुख्यमंत्री रहते हुए अपने परिजनों की कंपनियों को करोड़ों रुपये के सरकारी ठेके आवंटित करने का आरोप है।
मुख्य बिंदु:
* जांच का दायरा: कोर्ट ने 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 के बीच आवंटित किए गए सभी सार्वजनिक कार्य अनुबंधों (Public Works Contracts) की जांच करने को कहा है।
* किस पर हैं आरोप: आरोप है कि मुख्यमंत्री की पत्नी की कंपनी (M/s Brand Eagles), उनके पिता की दूसरी पत्नी (रिनचिन ड्रेमा) और उनके भतीजे (त्सेरिंग ताशी) से जुड़ी कंपनियों को नियमों को ताक पर रखकर 1,270 करोड़ रुपये से अधिक के ठेके दिए गए।
* बेंच का फैसला: जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने यह आदेश दिया। बेंच ने टिप्पणी की कि “यह एक ‘अजीब संयोग’ है कि राज्य में इतने बड़े पैमाने पर काम के आदेश केवल मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्यों को ही मिल रहे थे।”
कोर्ट के कड़े निर्देश:
* समय सीमा: सीबीआई को 2 सप्ताह के भीतर प्रारंभिक जांच शुरू करनी होगी और 16 सप्ताह के भीतर कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
* राज्य सरकार का सहयोग: सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया है, जो सीबीआई को सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराएगा।
* रिकॉर्ड की सुरक्षा: कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जांच से संबंधित कोई भी सरकारी रिकॉर्ड नष्ट नहीं होना चाहिए।
मामले की पृष्ठभूमि:
यह मामला ‘सेव मोन रीजन फेडरेशन’ (Save Mon Region Federation) और ‘वॉलंटरी अरुणाचल सेना’ नामक गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) के बाद सामने आया। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इन ठेकों के आवंटन में किसी भी पारदर्शी निविदा प्रक्रिया (Open Tender) का पालन नहीं किया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ और केवल एक ही परिवार को फायदा पहुँचाया गया।
निष्कर्ष: यह आदेश पेमा खांडू की राजनीतिक साख के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है, क्योंकि जांच का दायरा पिछले 10 वर्षों के कार्यकाल को कवर कर रहा है। अब सबकी नजरें सीबीआई की प्रारंभिक रिपोर्ट पर टिकी हैं।
