राजनीति

6 अप्रैल स्थापना दिवस भारतीय जनता पार्टी: 2 सीटों से प्रचंड बहुमत तक, विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल का सफर

भारतीय जनता पार्टी (BJP): 2 सीटों से प्रचंड बहुमत तक, विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल का सफर

भारतीय राजनीति के फलक पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आज एक ऐसा नाम है, जो न केवल भारत बल्कि दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक संगठन के रूप में स्थापित हो चुका है। 6 अप्रैल 1980 को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान से शुरू हुआ यह सफर आज सत्ता के शीर्ष तक पहुँच चुका है। आइए जानते हैं, शून्य से शिखर तक की इस दिलचस्प कहानी को।

स्थापना और पहले अध्यक्ष: ‘अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा’

भारतीय जनता पार्टी की जड़ें भारतीय जनसंघ में निहित हैं, जिसकी स्थापना डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1951 में की थी। 1977 में आपातकाल के बाद जनसंघ का विलय ‘जनता पार्टी’ में हो गया था। हालांकि, ‘दोहरी सदस्यता’ (आरएसएस और पार्टी दोनों का सदस्य होना) के मुद्दे पर जनता पार्टी के भीतर कलह शुरू हो गई।

परिणामस्वरूप, जनसंघ के गुट ने अलग होने का फैसला किया और 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी का गठन किया गया। पार्टी के पहले अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी चुने गए। इसी दिन मुंबई में अपने ऐतिहासिक भाषण में वाजपेयी जी ने भविष्यवाणी की थी— “अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा।”

शुरुआती दौर: 2 सीटों का मजाक और संघर्ष

भाजपा के लिए शुरुआत बेहद चुनौतीपूर्ण रही। 1984 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को भारी हार का सामना करना पड़ा और वह केवल 2 सीटों पर सिमट गई। उस समय विपक्ष ने भाजपा का मजाक भी उड़ाया, लेकिन पार्टी ने अपनी विचारधारा को और प्रखर बनाने का संकल्प लिया।

राम मंदिर आंदोलन और आडवाणी का युग

1980 के दशक के उत्तरार्ध में, लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में भाजपा ने ‘हिंदुत्व’ और ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ को प्रमुखता दी। 1990 की सोमनाथ से अयोध्या तक की राम रथ यात्रा ने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी।

* 1989: पार्टी की सीटें 2 से बढ़कर 85 हो गईं।

* 1991: भाजपा 120 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल बनी।

* 1996: पहली बार भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और अटल बिहारी वाजपेयी 13 दिनों के लिए प्रधानमंत्री बने।

सत्ता का स्वाद: वाजपेयी सरकार (1998-2004)

1998 में भाजपा ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) बनाया और पूर्ण कार्यकाल की ओर कदम बढ़ाए। वाजपेयी जी के नेतृत्व में भारत ने पोखरण परमाणु परीक्षण किया, कारगिल युद्ध जीता और स्वर्णिम चतुर्भुज जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की नींव रखी। 2004 में ‘इंडिया शाइनिंग’ के नारे के बावजूद पार्टी को हार का सामना करना पड़ा और अगले 10 साल तक वह विपक्ष में रही।

मोदी युग: 2014 से अब तक का ‘प्रचंड’ सफर

2014 का चुनाव भाजपा के इतिहास का ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुआ। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को पीएम उम्मीदवार बनाया गया और पार्टी ने पहली बार अपने दम पर 282 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया।

* 2019: मोदी लहर और भी मजबूत हुई और भाजपा ने 303 सीटें जीतकर इतिहास दोहराया। इस दौरान अनुच्छेद 370 का खात्मा, राम मंदिर निर्माण की शुरुआत और तीन तलाक जैसे बड़े फैसले लिए गए।

* 2024: भाजपा ने लगातार तीसरी बार एनडीए सरकार बनाकर जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड की बराबरी की।

* 2026 (वर्तमान): आज भाजपा न केवल केंद्र बल्कि देश के अधिकांश राज्यों में प्रभावी है। वर्तमान में पार्टी का नेतृत्व संगठनात्मक रूप से नए चेहरों के हाथों में है, जिसमें नितिन नबीन को हाल ही में पार्टी की कमान सौंपी गई है (जे.पी. नड्डा के कार्यकाल के बाद)।

प्रमुख मील के पत्थर (Timeline)

| वर्ष | घटना |

| 1980 | भाजपा की स्थापना, अटल बिहारी वाजपेयी पहले अध्यक्ष। |

| 1984 | लोकसभा चुनाव में मात्र 2 सीटें मिलीं। |

| 1990 | सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा (लालकृष्ण आडवाणी)। |

| 1998 | पहली सफल गठबंधन सरकार (NDA) का गठन। |

| 2014 | नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार पूर्ण बहुमत (282 सीटें)। |

| 2019 | दूसरी बार प्रचंड बहुमत (303 सीटें)। |

| 2024 | लगातार तीसरी बार केंद्र में सत्ता में वापसी। |

भाजपा का यह सफर विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता, संगठन की मजबूती और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता का एक अनूठा उदाहरण है। 2 सीटों से शुरू होकर विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनने तक, भाजपा ने भारतीय राजनीति के व्याकरण को पूरी तरह बदल दिया है।

 

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