Thursday, July 23, 2026
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महाशक्तिशाली आगाज: 54 साल बाद चंद्रमा की ओर बढ़े मानवीय कदम, NASA के ‘आर्टेमिस-2’ मिशन का सफल प्रक्षेपण

महाशक्तिशाली आगाज: 54 साल बाद चंद्रमा की ओर बढ़े मानवीय कदम, NASA के ‘आर्टेमिस-2’ मिशन का सफल प्रक्षेपण

केनेडी स्पेस सेंटर, फ्लोरिडा: अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस-2 (Artemis II) मिशन को आज, 2 अप्रैल 2026 की सुबह सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। 1972 में ‘अपोलो 17’ के बाद यह पहला मौका है जब इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा को पार कर चंद्रमा की ओर रवाना हुआ है।

सुबह 3:54 बजे गूंजा फ्लोरिडा का तट

भारतीय समयानुसार सुबह 3:54 बजे (स्थानीय समयानुसार 1 अप्रैल की शाम), नासा के मेगा रॉकेट स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) ने नारंगी लपटों के साथ केनेडी स्पेस सेंटर के पैड 39B से उड़ान भरी। करीब 8 मिनट की प्रारंभिक उड़ान के बाद, ओरियन (Orion) अंतरिक्ष यान सफलतापूर्वक रॉकेट से अलग होकर अपनी निर्धारित कक्षा में स्थापित हो गया। मिशन कंट्रोल की घोषणा के साथ ही वहां मौजूद वैज्ञानिकों और दर्शकों में खुशी की लहर दौड़ गई।

इतिहास रचने वाले चार ‘महाबली’

इस मिशन के जरिए नासा ने अंतरिक्ष में विविधता का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। ओरियन कैप्सूल में सवार चार अंतरिक्ष यात्री मानव साहस की नई परिभाषा लिख रहे हैं:

* रीड वाइसमैन (कमांडर): मिशन का नेतृत्व कर रहे अनुभवी अंतरिक्ष यात्री।

* विक्टर ग्लोवर (पायलट): चंद्रमा मिशन पर जाने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति।

* क्रिस्टीना कोच (मिशन स्पेशलिस्ट): गहरे अंतरिक्ष की यात्रा करने वाली पहली महिला।

* जेरेमी हेन्सन (मिशन स्पेशलिस्ट): चंद्रमा की ओर जाने वाले पहले कनाडाई नागरिक।

10 दिनों का रोमांचक सफर

यह मिशन कुल 10 दिनों का है, जिसे ‘फ्री-रिटर्न ट्रेजेक्टोरी’ पर डिजाइन किया गया है।

* कक्षा परीक्षण: अगले 24 घंटों तक ओरियन यान पृथ्वी की उच्च कक्षा में रहकर अपने लाइफ सपोर्ट और नेविगेशन सिस्टम की जांच करेगा।

* लूनर फ्लाईबाई: इसके बाद यह चंद्रमा की ओर प्रस्थान करेगा और चांद के पिछले हिस्से (Far Side) से लगभग 10,300 किलोमीटर की ऊंचाई से गुजरेगा।

* वापसी: चंद्रमा का चक्कर लगाकर यान वापस पृथ्वी की ओर मुड़ेगा और प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंडिंग (Splashdown) करेगा।

क्यों खास है यह मिशन?

नासा का यह मिशन केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि चंद्रमा पर स्थायी मानव बस्ती बसाने की दिशा में पहला बड़ा कदम है।

* आर्टेमिस-3 की तैयारी: इस मिशन की सफलता तय करेगी कि इंसान 2027-28 तक चंद्रमा की सतह पर दोबारा कदम रख पाएगा या नहीं।

* मंगल का द्वार: चंद्रमा को एक ‘लॉन्चिंग पैड’ की तरह इस्तेमाल कर नासा भविष्य में मंगल ग्रह (Mars) तक पहुंचने की योजना बना रहा है।

> “आज हमने साबित कर दिया है कि इंसान की कल्पना की कोई सीमा नहीं है। 54 साल बाद हम न केवल वापस जा रहे हैं, बल्कि इस बार हम वहां रुकने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए रास्ता बनाने जा रहे हैं।” — बिल नेल्सन, नासा एडमिनिस्ट्रेटर

इस सफल लॉन्च के साथ ही दुनिया भर के वैज्ञानिकों की नजरें अब ओरियन यान की अगली हलचलों और उसके चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश पर टिकी हैं। मानवता के इस साहसिक सफर ने अंतरिक्ष युग के एक नए स्वर्ण काल की शुरुआत कर दी है।

 

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