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आंध्र प्रदेश से नक्सलवाद का ‘सफाया’: खूंखार कमांडर राव समेत 9 उग्रवादियों का सरेंडर, DGP का बड़ा दावा

आंध्र प्रदेश से नक्सलवाद का ‘सफाया’: खूंखार कमांडर राव समेत 9 उग्रवादियों का सरेंडर, DGP का बड़ा दावा

अमरावती, 30 मार्च 2026: आंध्र प्रदेश पुलिस ने आज राज्य में वामपंथी उग्रवाद (LWE) के पूर्ण खात्मे का औपचारिक एलान कर दिया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) हरीश कुमार गुप्ता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि राज्य में अब माओवादी भूमिगत अभियान का एक भी सक्रिय कैडर नहीं बचा है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि तब हासिल हुई जब मोस्ट वांटेड नक्सली नेता सी. नारायण राव ने अपने 8 साथियों के साथ पुलिस के सामने हथियार डाल दिए।

कौन है सी. नारायण राव? (36 साल का खूनी इतिहास)

नारायण राव आंध्र-ओडिशा बॉर्डर (AOB) का सचिव था और संगठन का एक स्तंभ माना जाता था। 1990 में माओवादी आंदोलन से जुड़ा राव कई सनसनीखेज वारदातों का मास्टरमाइंड था:

* विधायक की हत्या: साल 2018 में विधायक किदारी सर्वेश्वर राव की हत्या का मुख्य आरोपी।

* पुलिस पर हमले: 2001 में सीआई गांधी और 1997 में मुख्य आरक्षक नरेंद्र दास की हत्या जैसे संगीन अपराधों में शामिल।

* रणनीतिकार: वह पिछले 36 सालों से जंगलों में रहकर नक्सली गतिविधियों का संचालन कर रहा था।

31 मार्च की डेडलाइन से पहले मिली सफलता

DGP गुप्ता ने बताया कि केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य रखा था। आंध्र प्रदेश ने इस समय सीमा से एक दिन पहले ही इसे हासिल कर लिया है।

* अभियान के आंकड़े: पिछले दो वर्षों में उग्रवाद विरोधी अभियानों के तहत कुल 18 मुठभेड़ें हुईं, 81 गिरफ्तारियां की गईं और 106 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया।

* पड़ोसी राज्यों की मदद: आंध्र प्रदेश के विशेष बलों (ग्रेहाउंड्स) ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों को भी माओवाद विरोधी ऑपरेशनों में तकनीकी और सामरिक सहायता प्रदान की।

क्यों हुआ नक्सलियों का मोहभंग?

पुलिस के अनुसार, माओवादियों के आत्मसमर्पण के पीछे तीन प्रमुख कारण रहे:

* विचारधारा का अंत: कैडर्स के बीच अब माओवादी विचारधारा के प्रति आकर्षण खत्म हो गया है।

* जनाधार की कमी: गांवों में विकास पहुँचने के कारण अब नक्सलियों को स्थानीय समर्थन मिलना बंद हो गया है।

* पुनर्वास नीति: आंध्र प्रदेश सरकार की आकर्षक पुनर्वास नीति, जो आत्मसमर्पण करने वालों को मुख्यधारा में लौटने के लिए आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है।

सुरक्षा बलों की सराहना

DGP ने इस सफलता का श्रेय ‘ग्रेहाउंड्स’ (Greyhounds), विशेष खुफिया शाखा (SIB) और जिला पुलिस इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय को दिया। उन्होंने कहा कि आज आंध्र प्रदेश का हर कोना माओवादी हिंसा से मुक्त है और शांति के एक नए युग की शुरुआत हो रही है।

मुख्य बिंदु: नारायण राव के आत्मसमर्पण के साथ ही AOB क्षेत्र में माओवादियों का संगठनात्मक ढांचा पूरी तरह ध्वस्त हो गया है।

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