उत्तराखंड की सियासत में ‘शब्द युद्ध’: बीजेपी के ‘रिजेक्टेड माल’ वाले बयान पर भड़की कांग्रेस, गोदियाल और महेंद्र भट्ट में तीखी नोकझोंक
उत्तराखंड की सियासत में ‘शब्द युद्ध’: बीजेपी के ‘रिजेक्टेड माल’ वाले बयान पर भड़की कांग्रेस, गोदियाल और महेंद्र भट्ट में तीखी नोकझोंक
देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में दल-बदल के खेल के बीच अब जुबानी जंग और भी तीखी हो गई है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट द्वारा कांग्रेस में शामिल होने वाले नेताओं को ‘बीजेपी से निकाला गया माल’ बताने पर सियासी घमासान छिड़ गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस बयान को ‘स्तरहीन’ करार देते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।
गणेश गोदियाल का पलटवार: “बीजेपी के संस्कारों का परिणाम”
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने महेंद्र भट्ट के बयान की निंदा करते हुए कहा कि एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष से ऐसे अशोभनीय शब्दों की उम्मीद नहीं थी।
* गरिमा का सवाल: गोदियाल ने कहा, “महेंद्र भट्ट उन पूर्व विधायकों के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिन्होंने सदन की गरिमा बढ़ाई है। जिस सदन में जाने के लिए भट्ट आज भी लालायित हैं, वहां के सम्मानित सदस्यों का अपमान करना उनकी ओछी मानसिकता दर्शाता है।”
* बीजेपी के संस्कार: गोदियाल ने तंज कसते हुए कहा कि यह बीजेपी के उन संस्कारों का नतीजा है जो उनके अंदर कूट-कूट कर भरे हैं। समाज का प्रतिनिधित्व करने वालों के लिए ऐसी भाषा का प्रयोग करना निंदनीय है।
* अभी और होगी जॉइनिंग: गोदियाल ने दावा किया कि भविष्य में बीजेपी के कई और ‘विचारवान’ और ‘प्रतिभावान’ नेता कांग्रेस में शामिल होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि कम से कम भविष्य में भट्ट अपने साथियों के लिए ऐसे शब्द नहीं बोलेंगे।
महेंद्र भट्ट का पलटवार: “अनुशासनहीनता के कारण हुए रिजेक्ट”
अपनी टिप्पणी पर मचे बवाल के बीच बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने झुकने के बजाय अपने स्टैंड को और कड़ा कर दिया है। उन्होंने कांग्रेस की आपत्तियों को उनकी ‘द्विअर्थी सोच’ का नतीजा बताया।
* रिजेक्टेड vs सिलेक्टेड: भट्ट ने स्पष्ट किया, “जो नेता अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के चलते बीजेपी से रिजेक्ट हुए हैं, कांग्रेस उन्हीं को सिलेक्ट कर रही है। कांग्रेस में जाने वाले लोगों से ज्यादा संख्या उन पुराने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की है जो इन नए लोगों के आने से नाराज हैं।”
* पार्टी की शुचिता: भट्ट का तर्क है कि बीजेपी केवल उन्हीं को बाहर करती है जो पार्टी के सिद्धांतों और अनुशासन पर खरे नहीं उतरते, और कांग्रेस ऐसे ही चेहरों को अपना सहारा बना रही है।
क्या है विवाद की जड़?
हाल ही में बीजेपी के कुछ बड़े नेताओं और पूर्व विधायकों ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। 2026 के विधानसभा चुनाव और स्थानीय निकाय चुनावों से पहले इस दल-बदल ने दोनों पार्टियों के बीच कड़वाहट बढ़ा दी है। जहां कांग्रेस इसे अपनी मजबूती मान रही है, वहीं बीजेपी इसे ‘कचरे की सफाई’ करार दे रही है।
सियासी मायने: जानकारों का मानना है कि इस तरह के तीखे बयानों से राज्य में चुनावी माहौल और गरमाएगा। आने वाले दिनों में और भी बड़े चेहरों के पाला बदलने की अटकलें तेज हैं।
