अन्तर्राष्ट्रीय

मिडिल ईस्ट में तैनात 3500 अमेरिकी जवान: समुद्र और जमीन पर तबाही मचाने वाले ‘अम्फिबियस ऑपरेशंस’ के असली महारथी

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य उपस्थिति को आक्रामक रूप से बढ़ा दिया है। हाल ही में 3,500 अमेरिकी जवानों की एक नई खेप इस इलाके में उतरी है। ये जवान कोई साधारण सैनिक नहीं हैं, बल्कि ये अम्फिबियस ऑपरेशन (Amphibious Operations) और रैपिड रिस्पॉन्स के महारथी माने जाते हैं।

यहाँ जानें इन जवानों की खासियत और इन्हें किस मकसद से तैनात किया गया है:

1. कौन हैं ये जवान और किसमें हैं ‘महारथी’?

ये 3,500 जवान मुख्य रूप से अमेरिकी नौसेना (US Navy) और US मरीन्स (US Marines) के सदस्य हैं, जो USS Tripoli (LHA-7) नामक विशाल युद्धपोत पर सवार होकर आए हैं।

* अम्फिबियस असॉल्ट (समुद्र से जमीन पर हमला): ये जवान समुद्र के रास्ते दुश्मन के तटीय इलाकों में घुसने और वहां कब्जा करने में माहिर होते हैं।

* 31st Marine Expeditionary Unit (MEU): इस यूनिट के जवान “स्पेशल ऑपरेशंस” के लिए प्रशिक्षित होते हैं। ये किसी भी संकट की स्थिति में दुनिया के किसी भी कोने में चंद घंटों के भीतर पहुंचने और मोर्चा संभालने की क्षमता रखते हैं।

* मल्टी-टास्किंग: ये जवान जमीन पर लड़ने के साथ-साथ हेलीकॉप्टर, वर्टिकल टेक-ऑफ वाले F-35B फाइटर जेट्स और ओस्प्रे (Osprey) विमानों के संचालन और उनके जरिए हमला करने में एक्सपर्ट होते हैं।

2. अमेरिका ने इन्हें अभी क्यों उतारा?

मिडिल ईस्ट में अमेरिका का E-3 Sentry (AWACS) विमान तबाह होने और बेस पर हुए हमले के बाद रणनीति बदल गई है। इन 3,500 जवानों की तैनाती के पीछे 3 मुख्य कारण हैं:

* तटीय ठिकानों की सुरक्षा: ईरान के पास एक विशाल समुद्री तट है। ये मरीन्स समुद्र में अमेरिकी जहाजों की सुरक्षा करने और जरूरत पड़ने पर ईरानी तटों पर ‘क्विक स्ट्राइक’ करने के लिए भेजे गए हैं।

* स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नजर: दुनिया का तेल व्यापार इसी रास्ते से होता है। इन जवानों का काम यह सुनिश्चित करना है कि ईरान इस रास्ते को बंद न कर पाए।

* खार्ग द्वीप (Kharg Island) पर नजर: रिपोर्ट्स के अनुसार, पेंटागन ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र ‘खार्ग द्वीप’ को निशाना बनाने या उसे ब्लॉक करने की योजना बना रहा है, जिसके लिए इन ‘महारथी’ जवानों की जरूरत है।

3. 82nd एयरबोर्न डिवीजन का साथ

इन 3,500 जवानों के अलावा, अमेरिका ने अपनी प्रसिद्ध 82nd Airborne Division के हजारों जवानों को भी अलर्ट पर रखा है।

* खासियत: ये जवान आसमान से पैराशूट के जरिए दुश्मन के इलाके में उतरने और पीछे से हमला करने (Parachute Assault) के उस्ताद होते हैं। इन्हें ‘अमेरिका की फायर ब्रिगेड’ कहा जाता है क्योंकि ये युद्ध शुरू होने के 18 घंटे के भीतर कहीं भी तैनात हो सकते हैं।

निष्कर्ष: इन जवानों की तैनाती का सीधा मतलब है कि अमेरिका अब केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहना चाहता। वह जमीन और समुद्र, दोनों रास्तों से ईरान को घेरने की तैयारी कर चुका है।

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