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ट्रंप का ’10 दिनों वाला दांव’: क्या होने वाला है बड़ा?

डोनाल्ड ट्रंप की राजनीति हमेशा से ‘अनिश्चितता’ और ‘सरप्राइज’ पर आधारित रही है। मार्च 2026 के आखिरी हफ्ते में ट्रंप ने ईरान को दी गई अपनी पुरानी डेडलाइन को 10 दिनों के लिए बढ़ाकर (6 अप्रैल 2026 तक) पूरी दुनिया को चौंका दिया है।

विशेषज्ञ इसे ट्रंप का एक बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’ या ‘नया दांव’ मान रहे हैं। यहाँ वे 4 बड़े संकेत दिए गए हैं जो बताते हैं कि इस 10 दिन की मोहलत के पीछे आखिर चल क्या रहा है:

ट्रंप का ’10 दिनों वाला दांव’: क्या होने वाला है बड़ा?

1. आर्थिक ‘पॉज़’ और तेल की कीमतों पर नियंत्रण

ईरान के साथ युद्ध और होर्मुज की बंदी ने कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को $100 के पार पहुँचा दिया था। ट्रंप प्रशासन का प्राथमिक लक्ष्य अमेरिकी अर्थव्यवस्था को महंगाई से बचाना है। 10 दिन की मोहलत देकर ट्रंप ने मार्केट को शांत किया है। जैसे ही हमले टले, तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई। यह मोहलत ट्रंप को तेल के वैकल्पिक इंतजाम (जैसे पाइपलाइन और स्ट्रैटेजिक रिजर्व) के लिए समय देती है।

2. ‘बैकचैनल’ डिप्लोमेसी और 15-सूत्रीय प्रस्ताव

खबरों के मुताबिक, अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है।

* संकेत: ट्रंप ने खुद कहा कि “बातचीत बहुत अच्छी चल रही है।”

* हालांकि ईरान सार्वजनिक रूप से इससे इनकार कर रहा है, लेकिन 10 दिन की मोहलत इस बात का पुख्ता संकेत है कि पर्दे के पीछे कोई बड़ी डील (जैसे परमाणु कार्यक्रम पर लगाम और होर्मुज खोलना) पक रही है।

3. ‘अल्टीमेटम’ के साथ सैन्य लामबंदी (Build-up)

ट्रंप ने 6 अप्रैल की शाम 8 बजे (EST) तक का समय दिया है। यह सिर्फ मोहलत नहीं, बल्कि एक सैन्य तैयारी का समय भी हो सकता है।

* रिपोर्ट्स के मुताबिक, हजारों अमेरिकी नौसैनिक और युद्धपोत इस वक्त मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहे हैं।

* मोहलत खत्म होने का मतलब होगा—या तो ईरान झुक जाएगा, या अमेरिका उसके ऊर्जा संयंत्रों (Energy Plants) पर भीषण हमला करेगा। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि वह “नरक जैसा मंजर” (unleash hell) दिखा देंगे।

4. सहयोगियों और विरोधियों की परीक्षा

इस मोहलत के जरिए ट्रंप दो चीजें देख रहे हैं:

* NATO की प्रतिक्रिया: ट्रंप ने हाल ही में नाटो सहयोगियों की आलोचना की है कि वे इस युद्ध में साथ नहीं दे रहे। 10 दिन का समय उन्हें अपना रुख साफ करने का मौका देता है।

* ईरान की मजबूरी: ट्रंप का मानना है कि ईरान की अर्थव्यवस्था युद्ध झेलने की स्थिति में नहीं है। 10 दिन का मानसिक दबाव ईरान को समझौते की मेज पर लाने का एक तरीका है।

निष्कर्ष: 6 अप्रैल का दिन क्यों है अहम?

ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वह “अंतहीन युद्ध” नहीं चाहते, लेकिन वह “नुकसानदेह शांति” भी स्वीकार नहीं करेंगे। मार्को रुबियो (अमेरिकी विदेश मंत्री) का यह बयान कि “युद्ध हफ्तों में खत्म होगा, महीनों में नहीं,” यह संकेत देता है कि 6 अप्रैल के बाद या तो ऐतिहासिक शांति समझौता होगा या फिर एक बड़ा सैन्य अभियान।

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