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विश्लेषण: क्यों ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर चलता है ईरान का सिक्का?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘ऑयल चोकपॉइंट’ है। भौगोलिक रूप से यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है, लेकिन खबरों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अक्सर ईरान का दबदबा ही नजर आता है।

विश्लेषण: क्यों ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर चलता है ईरान का सिक्का?

1. भूगोल और ‘किलर लोकेशन’

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अपने सबसे संकरे बिंदु पर केवल 21 मील (लगभग 34 किमी) चौड़ा है। इसमें जहाजों के आने-जाने के लिए केवल 2-2 मील की दो पतली लेन बनी हुई हैं। ईरान की तटरेखा इस जलडमरूमध्य के पूरे उत्तरी हिस्से को कवर करती है। इसके अलावा, खाड़ी के मुहाने पर स्थित रणनीतिक द्वीप (जैसे- अबु मूसा, ग्रेटर और लेसर टुनब्स) पर ईरान का सैन्य कब्जा है, जिससे वह पूरे ट्रैफिक पर सीधी नजर रख सकता है।

2. अंतरराष्ट्रीय कानून की अपनी व्याख्या

आमतौर पर समुद्री रास्तों पर ‘UNCLOS’ (United Nations Convention on the Law of the Sea) लागू होता है, जो जहाजों को ‘ट्रांजिट पैसेज’ (बिना रोक-टोक निकलने) का अधिकार देता है।

* ईरान का रुख: ईरान ने इस संधि पर हस्ताक्षर तो किए हैं, लेकिन इसे अपनी संसद से पास (Ratify) नहीं किया है।

* दलील: ईरान का कहना है कि वह केवल उन देशों को ‘इनोसेंट पैसेज’ (Innocent Passage) देगा जो उसके लिए खतरा नहीं हैं। वह अक्सर अमेरिकी या इजरायली जहाजों को रोकने या जांचने के लिए इसी कानूनी पेच का इस्तेमाल करता है।

3. ‘असिमेट्रिक वॉरफेयर’ की ताकत

ईरान के पास दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना तो नहीं है, लेकिन उसके पास ‘स्पीड बोट्स’, समुद्री बारूदी सुरंगें (Mines) और मिसाइलों का जंजाल है।

* ईरान जानता है कि वह खुले समुद्र में अमेरिका जैसी महाशक्ति से नहीं जीत सकता, इसलिए वह इस संकरे रास्ते का इस्तेमाल करता है। यहाँ एक भी टैंकर डूबने या सुरंग फटने से पूरी दुनिया का बीमा प्रीमियम बढ़ जाता है और तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं।

4. ओमान की शांतिपूर्ण नीति

स्ट्रेट का दूसरा हिस्सा ओमान के पास है। ओमान ऐतिहासिक रूप से एक शांत देश रहा है और वह ईरान के साथ टकराव के बजाय मध्यस्थता (Mediation) की नीति अपनाता है। ओमान इस विवाद में पड़ने के बजाय अपनी सीमाओं की सुरक्षा और व्यापार पर ध्यान देता है, जिससे मैदान ईरान के लिए खुला रह जाता है।

ताज़ा स्थिति: मार्च 2026 की रिपोर्ट

वर्तमान में मध्य पूर्व के तनाव के बीच, ईरान ने होर्मुज में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है:

* चुनिंदा ट्रैफिक: ईरान वर्तमान में केवल ‘मित्र देशों’ (जैसे चीन, भारत और रूस) के जहाजों को सुगम रास्ता दे रहा है, जबकि पश्चिमी देशों के टैंकरों को कड़े निरीक्षण और देरी का सामना करना पड़ रहा है।

* आर्थिक दबाव: वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20-25% इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान इसे एक ‘आर्थिक हथियार’ की तरह इस्तेमाल कर रहा है ताकि उस पर लगे प्रतिबंधों को कम करने के लिए दुनिया पर दबाव बनाया जा सके।

क्या कोई विकल्प है?

सऊदी अरब और यूएई ने पाइपलाइनों के जरिए इस रास्ते को बायपास करने की कोशिश की है, लेकिन अभी भी इराक, कुवैत और कतर जैसे देश पूरी तरह से इसी रास्ते पर निर्भर हैं। जब तक दुनिया की तेल पर निर्भरता खत्म नहीं होती, तब तक इस 34 किमी के टुकड़े पर ईरान की ‘दादागिरी’ खत्म करना मुश्किल है।

 

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