कॉर्बेट टाइगर रिजर्व: 1 अप्रैल को लॉटरी से तय होगा जिप्सियों का प्रवेश; नए और पुराने मालिकों के बीच छिड़ी ‘कानूनी जंग’
विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) में जिप्सियों के प्रवेश और स्थायी परमिट को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब कॉर्बेट प्रशासन 1 अप्रैल 2026 को लॉटरी सिस्टम के जरिए जिप्सियों का चयन करने जा रहा है, लेकिन नई चयन प्रक्रिया को लेकर पुराने और नए जिप्सी स्वामियों के बीच रार शुरू हो गई है।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व: 1 अप्रैल को लॉटरी से तय होगा जिप्सियों का प्रवेश; नए और पुराने मालिकों के बीच छिड़ी ‘कानूनी जंग’
पार्क प्रशासन ने सीटों से अधिक आवेदन आने के कारण लॉटरी सिस्टम अपनाने का फैसला किया है, जिसे लेकर कुछ कारोबारी अब दोबारा कोर्ट जाने की चेतावनी दे रहे हैं।
1. लॉटरी का गणित: सीटों के मुकाबले ज्यादा दावेदार
कॉर्बेट के उपनिदेशक राहुल मिश्रा के अनुसार, कुल 130 जिप्सियों के स्लॉट में से 93 वाहनों के लिए लॉटरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। आवेदनों की स्थिति इस प्रकार है:
* ओपन कैटेगरी: इस श्रेणी में 43 सीटें उपलब्ध हैं, जिनके लिए 64 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
* EDC (ईको डेवलपमेंट कमेटी) श्रेणी: यहाँ 50 सीटों के लिए 66 आवेदन आए हैं।
* चयन प्रक्रिया: चूंकि आवेदनों की संख्या सीटों से अधिक है, इसलिए निष्पक्षता बनाए रखने के लिए 1 अप्रैल को पारदर्शी लॉटरी निकाली जाएगी।
2. विवाद की जड़: अनुभव बनाम नए परमिट
विवाद मुख्य रूप से ‘प्राथमिकता’ (Priority) को लेकर है।
* पुराने मालिकों का पक्ष: ओपन कैटेगरी में 5 और 8 साल के अनुभव वाले जिप्सी मालिकों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है।
* नए स्वामियों का आरोप: नए जिप्सी स्वामियों, जैसे नमित अग्रवाल का कहना है कि यह अनुभव वाली कैटेगरी बनाकर पुराने लोगों को पिछले दरवाजे से फायदा पहुंचाया जा रहा है। उनका तर्क है कि जब मामला हाईकोर्ट गया था, तो कोर्ट ने सभी के लिए समान अवसर की बात कही थी।
* प्रशासन का तर्क: ईडीसी श्रेणी में अनुभव के आधार पर प्राथमिकता का कोई प्रावधान 2024 की गाइडलाइन में नहीं है, इसलिए वहां प्रक्रिया सामान्य रहेगी।
3. हाईकोर्ट का पिछला फैसला और घटनाक्रम
यह मामला काफी समय से कानूनी दांवपेच में फंसा है:
* वन मंत्री का आदेश: साल 2024 में वन मंत्री ने एक आदेश जारी कर 2022 के बाद के स्थायी परमिट वाली जिप्सियों के प्रवेश पर रोक लगा दी थी।
* कोर्ट की राहत: इसके खिलाफ 15 जिप्सी स्वामी हाईकोर्ट पहुंचे। कोर्ट ने वन मंत्री के उस पत्र को खारिज करते हुए नए परमिट धारकों के पक्ष में फैसला सुनाया था।
* ताजा स्थिति: हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही प्रशासन ने नए परमिट धारकों को प्रक्रिया में शामिल किया है, लेकिन अब ‘लॉटरी की शर्तों’ ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।
4. कारोबारियों की चेतावनी
जिप्सी कारोबारियों का एक गुट इस लॉटरी व्यवस्था से असंतुष्ट है। उनका कहना है कि यदि सबको समान अवसर नहीं मिला और भेदभाव जारी रहा, तो वे दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। —
पर्यटकों पर क्या होगा असर?
1 अप्रैल को होने वाली इस प्रक्रिया का सीधा असर कॉर्बेट आने वाले पर्यटकों पर पड़ेगा। यदि विवाद बढ़ा या हड़ताल जैसी स्थिति बनी, तो जंगल सफारी की बुकिंग प्रभावित हो सकती है। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि लॉटरी के बाद सफारी संचालन और अधिक व्यवस्थित हो जाएगा।
