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औद्योगिक क्रांति 2.0: तेल की जगह बिजली और ग्रीन हाइड्रोजन

बड़ी फैक्ट्रियों और भारी उद्योगों (Heavy Industries) में तेल और कोयले की निर्भरता कम कर उन्हें बिजली (Electrification) और क्लीन एनर्जी पर शिफ्ट करने के लिए भारत सरकार ने ‘मिशन मोड’ में काम शुरू कर दिया है।

मार्च 2026 की ताजा रिपोर्टों और बजट 2026-27 के अनुसार, सरकार का मुख्य फोकस स्टील, सीमेंट और रिफाइनरी जैसे ‘हार्ड-टू-एबेट’ (जहाँ प्रदूषण कम करना मुश्किल है) सेक्टर्स पर है।

यहाँ सरकार के मास्टर प्लान के प्रमुख बिंदु दिए गए हैं:

औद्योगिक क्रांति 2.0: तेल की जगह बिजली और ग्रीन हाइड्रोजन

1. ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी (NEP) 2026

सरकार ने जनवरी 2026 में नई NEP 2026 का ड्राफ्ट पेश किया है। इसका उद्देश्य उद्योगों के लिए बिजली को न केवल सुलभ बल्कि किफायती बनाना है।

* इंडस्ट्रियल टैरिफ में सुधार: उद्योगों पर लगने वाले भारी ‘क्रॉस-सब्सिडी’ बोझ को कम करने की योजना है, ताकि फैक्ट्रियों के लिए बिजली, तेल के मुकाबले सस्ती पड़े।

* डायरेक्ट स्टीम यूटिलाइजेशन: थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली भाप का सीधे औद्योगिक प्रक्रियाओं में उपयोग करने की तकनीक पर जोर दिया जा रहा है।

2. ग्रीन हाइड्रोजन का ‘पायलट प्रोजेक्ट’

भारी उद्योगों (जैसे स्टील और रिफाइनरी) में जहाँ केवल बिजली से काम नहीं चल सकता, वहाँ सरकार ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ को ईंधन के रूप में स्थापित कर रही है।

* स्टील सेक्टर: मार्च 2026 में, MECON (सरकारी संस्था) ने स्टील प्लांटों में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग के लिए पायलट प्रोजेक्ट्स शुरू किए हैं।

* लक्ष्य: 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य है।

3. बजट 2026: कार्बन कैप्चर और टैक्स छूट

* ₹20,000 करोड़ का फंड: बजट में कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज (CCUS) तकनीकों के लिए विशेष आवंटन किया गया है। यह उन फैक्ट्रियों के लिए है जो पूरी तरह बिजली पर शिफ्ट नहीं हो सकतीं, ताकि वे अपने धुएं को हवा में छोड़ने के बजाय ‘कैप्चर’ कर सकें।

* कस्टम ड्यूटी में छूट: इलेक्ट्रिक भट्ठियों (Electric Furnaces) और अन्य बिजली आधारित औद्योगिक मशीनों के आयात पर टैक्स कम कर दिया गया है।

4. भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) की एडवाइजरी

25 मार्च 2026 को मंत्रालय ने ऑटोमोबाइल और अन्य बड़ी मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को एक निर्देश जारी किया है:

* शिफ्टिंग शेड्यूल: फैक्ट्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपने मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन्स को तेल से बिजली पर शिफ्ट करें।

* एनर्जी ऑडिट: अब बड़ी फैक्ट्रियों के लिए नियमित ‘एनर्जी ऑडिट’ अनिवार्य किया जा रहा है ताकि फिजूल तेल खपत को रोका जा सके।

5. ‘इंडियन कार्बन मार्केट’ की शुरुआत

सरकार ने इंडियन कार्बन मार्केट पोर्टल लॉन्च किया है। जो फैक्ट्रियां तेजी से बिजली (क्लीन एनर्जी) पर शिफ्ट होंगी, उन्हें ‘कार्बन क्रेडिट’ मिलेंगे, जिन्हें वे बाजार में बेचकर मुनाफा कमा सकेंगी।

चुनौतियां और समाधान

हालांकि, फैक्ट्रियों को पूरी तरह बिजली पर शिफ्ट करने में बड़ा निवेश (CAPEX) लगता है। इसके समाधान के लिए सरकार PLI (Production Linked Incentive) स्कीम के दायरे को बढ़ाने पर विचार कर रही है, ताकि मशीनों को बदलने का खर्च कम हो सके।

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