धर्म

राम जन्मोत्सव पर भगवान राम की ये स्तुति दिलाएगी विशेष फल, सोया हुआ भाग्य भी जाग जाएगा

रामनवमी के पावन पर्व पर प्रभु श्री रामचंद्र जी की आराधना के लिए ‘श्रीराम स्तुति’ का पाठ अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित यह स्तुति न केवल मन को शांति देती है, बल्कि मान्यता है कि इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।

यहाँ संपूर्ण श्रीराम स्तुति अर्थ सहित दी गई है:

॥ श्रीराम स्तुति ॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्।

नवकंज लोचन, कंज मुख, कर कंज, पद कंजारुणम् ॥१॥

> अर्थ: हे मन! कृपालु श्री रामचंद्र जी का भजन कर, जो संसार के जन्म-मरण रूपी भारी भय को दूर करने वाले हैं। जिनके नेत्र नए खिले हुए कमल के समान हैं, जिनका मुख, हाथ और चरण भी लाल कमल के समान सुंदर हैं।

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कंदर्प अगणित अमित छवि, नवनील नीरद सुंदरम्।

पट पीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरम् ॥२॥

> अर्थ: जिनके शरीर की शोभा अनगिनत कामदेवों से भी बढ़कर है, जिनका रंग नवीन नील-जलभरे बादल के समान सुंदर है। जो पीतांबर धारण किए हुए ऐसे लग रहे हैं, मानो बिजली चमक रही हो। ऐसे पवित्र जानकीनाथ (माता सीता के पति) को मैं प्रणाम करता हूँ।

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भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।

रघुनंद आनंदकंद कोशल चंद दशरथ नंदनम् ॥३॥

> अर्थ: हे मन! उन दीनबंधु, सूर्य के समान तेजस्वी, दानव और दैत्यों के वंश का नाश करने वाले श्री राम का भजन कर। जो रघुकुल के आनंद के मूल, कोशल देश के चंद्रमा और राजा दशरथ के पुत्र हैं।

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सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणम्।

आजानुभुज शर चाप धर, संग्राम जित खर दूषणम् ॥४॥

> अर्थ: जिनके सिर पर रत्नजड़ित मुकुट, कानों में कुंडल, माथे पर सुंदर तिलक और प्रत्येक अंग में सुंदर आभूषण सुशोभित हैं। जिनकी भुजाएँ घुटनों तक लंबी हैं और जो हाथ में धनुष-बाण लिए हुए हैं, जिन्होंने युद्ध में खर और दूषण जैसे राक्षसों को जीत लिया है।

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इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।

मम हृदय कंज निवास कुरु, कामादि खल दल गंजनम् ॥५॥

> अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं— जो भगवान शिव, शेषनाग और मुनियों के मन को आनंद देने वाले हैं, वही श्री रघुनाथ जी काम, क्रोध और लोभ आदि शत्रुओं का नाश करने वाले हैं। वे मेरे हृदय रूपी कमल में सदा निवास करें।

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मनु जाहि राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सांवरो।

करुणा निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो ॥६॥

एही भांति गौरी असीस सुनि सिय सहित हियं हरषीं अली।

तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली ॥७॥

रामनवमी पर पाठ करने के लाभ:

* नकारात्मकता का नाश: घर और मन से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

* सौभाग्य की प्राप्ति: बिगड़े हुए काम बनने लगते हैं और भाग्य का साथ मिलता है।

* मानसिक शांति: एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक तनाव कम होता है।

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