ईरान ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद करने की दी नई धमकी, होर्मुज के बाद बढ़ा वैश्विक खतरा
ईरान ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद करने की दी नई धमकी, होर्मुज के बाद बढ़ा वैश्विक खतरा
ईरान ने बुधवार को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका या उसके सहयोगी उसके क्षेत्र या द्वीपों पर ज़मीन हमला करते हैं, तो वह लाल सागर के महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य बाब अल-मंदेब (Bab el-Mandeb) को बंद करने या वहां जहाजों की सुरक्षा को खतरे में डालने का कदम उठा सकता है। ईरान की सेमी-ऑफिशियल तस्नीम न्यूज एजेंसी ने एक अनाम सैन्य सूत्र के हवाले से यह बयान दिया। यह धमकी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पहले से चल रहे तनाव के बीच आई है, जहां ईरान पहले ही जहाजों की आवाजाही पर दबाव बना रहा है।
ईरान के मुताबिक, अगर अमेरिका खार्ग द्वीप या अन्य इलाकों पर हमला बढ़ाता है तो उसके प्रॉक्सी बल (खासकर यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही) बाब अल-मंदेब में नया मोर्चा खोल सकते हैं। सूत्र ने कहा, “ईरान के पास इच्छाशक्ति और क्षमता दोनों हैं कि वह इस रणनीतिक जलडमरूमध्य में विश्वसनीय खतरा पैदा कर सके।”
बाब अल-मंदेब स्ट्रेट क्यों है इतना खास?
बाब अल-मंदेब (जिसका अरबी मतलब है “आंसुओं का द्वार”) यमन और जिबूती के बीच स्थित एक संकीर्ण जलडमरूमध्य है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी (और आगे भारतीय महासागर) से जोड़ता है। इससे गुजरने वाले जहाज सुएज नहर के रास्ते यूरोप पहुंचते हैं।
व्यापारिक महत्व: दुनिया का लगभग 10-12% समुद्री व्यापार (कंटेनर जहाज, अनाज, उपभोक्ता सामान) और 6-8 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल इस रास्ते से गुजरता है। यह यूरोप और एशिया के बीच सबसे छोटा रूट है – अफ्रीका के चक्कर लगाने से 10-15 दिन बच जाते हैं।
रणनीतिक स्थिति: यह मात्र 18 मील चौड़ा है और दो संकीर्ण चैनलों में बंटा है, जिससे इसे आसानी से नियंत्रित या बाधित किया जा सकता है। हूती विद्रोही पहले भी यहां हमले कर चुके हैं, जिससे शिपिंग कंपनियां रूट बदलने को मजबूर हुईं और माल ढुलाई लागत बढ़ी।
वैश्विक प्रभाव: अगर यह बंद हुआ तो तेल की कीमतें बढ़ेंगी, सप्लाई चेन बाधित होगी और यूरोप-एशिया व्यापार पर भारी असर पड़ेगा। होर्मुज स्ट्रेट तेल निर्यात का मुख्य द्वार है, जबकि बाब अल-मंदेब बाकी व्यापार (कंटेनर, अन्य सामान) का गेटवे है।
पृष्ठभूमि और संभावित प्रभाव
यह धमकी ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के बीच आई है, जब होर्मुज स्ट्रेट पहले ही प्रभावित है। हूती विद्रोही, जो ईरान के करीबी माने जाते हैं, यमन के तट पर नियंत्रण रखते हैं और पहले रेड सी में हमले कर चुके हैं। अगर हूती सक्रिय हुए तो शिपिंग कंपनियां फिर से अफ्रीका का लंबा रास्ता चुन सकती हैं, जिससे फ्रेट कॉस्ट और महंगाई बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह ईरान की असममित रणनीति का हिस्सा है – बड़े संघर्ष में छोटे-छोटे चोकपॉइंट्स का इस्तेमाल कर दुश्मन को नुकसान पहुंचाना। फिलहाल कोई तत्काल बंदी नहीं हुई है, लेकिन खतरा बढ़ गया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए दोनों स्ट्रेट्स (होर्मुज और बाब अल-मंदेब) का खुला रहना बेहद जरूरी है। आगे की स्थिति पर नजर रखनी होगी, क्योंकि कोई भी गलत कदम पूरे क्षेत्र में बड़े संकट को जन्म दे सकता है।
