Meta पर ₹3,100 करोड़ का भारी जुर्माना: बच्चों को ‘खतरनाक कंटेंट’ परोसने के आरोप में कोर्ट का कड़ा फैसला
फेसबुक और इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी Meta पर एक अमेरिकी अदालत ने भारी-भरकम जुर्माना लगाया है। कंपनी पर आरोप है कि उसने अपने प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा की अनदेखी की और उन्हें हानिकारक कंटेंट (Sexual Content) और ऑनलाइन शिकारियों (Predators) के संपर्क में आने दिया।
Meta पर ₹3,100 करोड़ का भारी जुर्माना: बच्चों को ‘खतरनाक कंटेंट’ परोसने के आरोप में कोर्ट का कड़ा फैसला
सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) एक बार फिर बड़ी कानूनी मुसीबत में फंस गई है। अमेरिका के न्यू मैक्सिको की एक जूरी ने कंपनी को बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने और उन्हें यौन शोषण (Sexual Exploitation) के खतरों में डालने का दोषी पाया है। कोर्ट ने कंपनी पर 375 मिलियन डॉलर (करीब 3,125 करोड़ रुपये) की पेनल्टी लगाई है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टॉरेज़ द्वारा दायर किया गया था। जांच के दौरान चौंकाने वाले खुलासे हुए:
* अंडरकवर ऑपरेशन: राज्य के जांचकर्ताओं ने 14 साल से कम उम्र के बच्चों के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाए।
* शिकारियों का जाल: इन प्रोफाइल्स पर न केवल यौन संबंधित कंटेंट (Sexualized Content) दिखाई दिया, बल्कि कई वयस्क पुरुषों ने इन ‘फर्जी बच्चों’ से यौन संपर्क साधने की कोशिश भी की।
* गिरफ्तारी: इस जांच के आधार पर दो व्यक्तियों को गिरफ्तार भी किया गया, जो एक 12 साल की बच्ची (जांचकर्ता) से मिलने होटल पहुंचे थे।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
जूरी ने सात सप्ताह की लंबी सुनवाई के बाद यह माना कि मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म (Facebook, Instagram, WhatsApp) की सुरक्षा को लेकर जनता को गुमराह किया।
* मुनाफा बनाम सुरक्षा: अदालत ने कहा कि मेटा ने बच्चों की सुरक्षा के बजाय अपने मुनाफे (Profits) को प्राथमिकता दी।
* लापरवाही: कंपनी के पास ऐसे टूल्स थे जिनसे इन खतरों को रोका जा सकता था, लेकिन उन्हें लागू नहीं किया गया ताकि यूजर्स का एंगेजमेंट कम न हो।
* हजारों उल्लंघन: जूरी ने मेटा को हजारों उल्लंघनों का दोषी पाया और प्रत्येक उल्लंघन के लिए अधिकतम जुर्माना लगाया।
मेटा का पक्ष
मेटा ने इस फैसले पर असहमति जताई है और कहा है कि वे इसके खिलाफ अपील करेंगे। कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि वे प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं और सुरक्षा फीचर्स पर करोड़ों डॉलर खर्च करते हैं।
अटॉर्नी जनरल का बयान:
“यह उन सभी बच्चों और परिवारों की ऐतिहासिक जीत है, जिन्होंने मेटा द्वारा बच्चों की सुरक्षा से ऊपर मुनाफे को चुनने की कीमत चुकाई है।”
भविष्य पर असर
यह फैसला दुनिया भर की टेक कंपनियों के लिए एक चेतावनी है। वर्तमान में मेटा और गूगल जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर कई देशों में मुकदमे चल रहे हैं। यह भारी जुर्माना अन्य देशों में भी सख्त कानूनों और बड़ी पेनल्टी का आधार बन सकता है।
