उत्तराखंड

धामी सरकार के 4 साल: कांग्रेस का ‘पलटवार’; प्रीतम सिंह बोले- “बेमिसाल नहीं, बेहाल है उत्तराखंड”, यशपाल आर्य ने मांगा श्वेत पत्र

उत्तराखंड में धामी सरकार के चार साल पूरे होने पर जहाँ भाजपा जश्न मना रही है, वहीं कांग्रेस ने ‘आक्रामक’ रुख अपनाते हुए सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार के ‘बेमिसाल’ दावों को ‘बेहाल’ करार देते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

धामी सरकार के 4 साल: कांग्रेस का ‘पलटवार’; प्रीतम सिंह बोले- “बेमिसाल नहीं, बेहाल है उत्तराखंड”, यशपाल आर्य ने मांगा श्वेत पत्र

देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है। धामी सरकार के चार साल के कार्यकाल को कांग्रेस ने पूरी तरह विफल बताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार केवल विज्ञापनों और घोषणाओं में व्यस्त है, जबकि धरातल पर जनता बदहाली झेल रही है।

1. प्रीतम सिंह के तीखे प्रहार: “युवाओं और पहाड़ों के साथ छल”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह ने सरकार के कार्यकाल को ‘विफलता का दस्तावेज’ बताया:

* बेरोजगारी: सरकार 30 हजार नौकरियों का दावा कर रही है, जबकि प्रदेश के रोजगार कार्यालयों में 10 लाख युवा पंजीकृत हैं।

* पलायन और शिक्षा: प्रीतम सिंह ने दावा किया कि राज्य के 1,726 गांव निर्जन (Ghost Villages) हो चुके हैं और करीब 1,700 स्कूल बंद हो गए हैं। पलायन आयोग की रिपोर्ट केवल फाइलों में दबी है।

* कुपोषण: उन्होंने चौंकाने वाला आंकड़ा देते हुए कहा कि प्रदेश में कुपोषण की दर 56% तक पहुंच गई है।

* रेफर सेंटर बने अस्पताल: पहाड़ों के मेडिकल कॉलेज और अस्पताल केवल मरीजों को हायर सेंटर भेजने (Refer) का जरिया बनकर रह गए हैं।

2. नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य की मांग: “जारी करें श्वेत पत्र”

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार से पारदर्शिता की मांग करते हुए ‘श्वेत पत्र’ (White Paper) जारी करने को कहा है। उनके मुख्य सवाल निम्नलिखित हैं:

* महंगाई और भ्रष्टाचार: सरकार बताए कि महंगाई रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए? उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो गई हैं।

* आपदा प्रबंधन: आर्य ने पूछा कि क्या सरकार ने आपदा प्रभावितों के लिए कोई स्पष्ट पुनर्वास नीति बनाई है या कोई पूर्व चेतावनी तंत्र (Early Warning System) विकसित किया गया है?

* अवैध खनन और शराब: कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आबकारी और खनन नीति केवल माफियाओं को संरक्षण देने के लिए बनाई गई है।

कांग्रेस के 5 बड़े सवाल (जो सरकार से पूछे गए):

* 10 लाख बेरोजगारों के भविष्य के लिए सरकार के पास क्या रोडमैप है?

* पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए ठोस नीति धरातल पर क्यों नहीं उतरी?

* वन्यजीव-मानव संघर्ष रोकने के लिए बजट में प्रावधान क्यों नहीं किया गया?

* आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद कर्ज का बोझ क्यों बढ़ाया जा रहा है?

* स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर पहाड़ों की जनता को ‘रेफर सेंटर’ के भरोसे क्यों छोड़ा गया?

निष्कर्ष

कांग्रेस का मानना है कि उत्तराखंड की जनता अब केवल ‘ढिंढोरा पीटने’ से संतुष्ट नहीं होगी। विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी चुनावों में ‘बदहाल उत्तराखंड’ उनका मुख्य चुनावी मुद्दा होगा और वे सरकार को जवाबदेही के लिए मजबूर करेंगे।

 

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