अध्यात्म और सत्ता का पावन मिलन: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पहुंचीं प्रेमानंद महाराज के द्वार; जन्मदिन पर दी बधाई, लिया आशीर्वाद
अयोध्या में प्रभु श्री राम के दर्शन करने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अब कान्हा की नगरी मथुरा-वृंदावन के प्रवास पर हैं। आज सुबह उन्होंने प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से भेंट कर आध्यात्मिक चर्चा की।
अध्यात्म और सत्ता का पावन मिलन: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पहुंचीं प्रेमानंद महाराज के द्वार; जन्मदिन की बधाई दे लिया आशीर्वाद
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने मथुरा प्रवास के दौरान आज सुबह वृंदावन स्थित श्रीहित राधा केलि कुंज आश्रम पहुंचीं। यहाँ उन्होंने प्रख्यात संत श्री प्रेमानंद जी महाराज से भेंट की। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच हुई इस मुलाकात ने पूरे आश्रम परिसर को श्रद्धा और भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया।
मुलाकात की मुख्य बातें:
* जन्मदिन की दी बधाई: संयोगवश, गुरुवार को ही संत प्रेमानंद महाराज का जन्मदिन था। राष्ट्रपति मुर्मू ने महाराज जी को हाथ जोड़कर प्रणाम किया और उन्हें जन्मदिन की मंगलकामनाएं दीं। संत ने भी प्रसन्न मुद्रा में ‘राधे-राधे’ कहकर राष्ट्रपति का अभिवादन स्वीकार किया।
* एकांतिक वार्तालाप: राष्ट्रपति और संत के बीच काफी देर तक एकांत में चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान अध्यात्म, निस्वार्थ सेवा और जनकल्याण जैसे गंभीर विषयों पर विमर्श किया गया।
* श्रद्धा भाव: राष्ट्रपति ने प्रेमानंद महाराज के सरल जीवन और उनके प्रभावशाली आध्यात्मिक उपदेशों के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने आश्रम में महाराज जी के प्रवचन भी सुने।
* भव्य स्वागत: आश्रम पहुँचने पर महाराज जी के शिष्यों और परिकरों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ राष्ट्रपति का स्वागत किया।
अयोध्या से मथुरा तक का सफर
मथुरा पहुँचने से पहले राष्ट्रपति गुरुवार को अयोध्या धाम में थीं, जहाँ उनका दौरा ऐतिहासिक रहा:
* श्री राम यंत्र की स्थापना: उन्होंने राम मंदिर में 150 किलोग्राम सोने से जड़ित ‘श्री राम यंत्र’ की स्थापना की।
* रामलला के दर्शन: राष्ट्रपति ने रामलला की आरती उतारी और देश की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
भक्तिमय प्रवास: राष्ट्रपति का यह दौरा पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आ रहा है। अयोध्या में रामलला के चरणों में शीश नवाने के बाद, वृंदावन में संतों का आशीर्वाद लेना उनके अटूट श्रद्धा भाव को दर्शाता है।
