‘अमेरिका हमारा सहयोगी, कठपुतली नहीं’: नेतन्याहू ने खारिज की राष्ट्रपति ट्रंप को युद्ध में घसीटने की खबरें; ईरान की सैन्य शक्ति ‘शून्य’ होने का दावा
इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध (Operation Lion’s Roar) के 20वें दिन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दुनिया के सामने अपना पक्ष रखा है। साउथ पार्स गैस फील्ड पर हुए हमले और अमेरिका की भूमिका को लेकर उन्होंने स्थिति स्पष्ट की है।
‘अमेरिका हमारा सहयोगी, कठपुतली नहीं’: नेतन्याहू ने खारिज की राष्ट्रपति ट्रंप को युद्ध में घसीटने की खबरें; ईरान की सैन्य शक्ति ‘शून्य’ होने का दावा
यरूशलेम/तेहरान (20 मार्च 2026): इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार रात विदेशी मीडिया को संबोधित करते हुए उन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि इजरायल ने अमेरिका को जानबूझकर ईरान के साथ युद्ध में धकेला है। नेतन्याहू ने इन खबरों को ‘फेक न्यूज’ करार दिया और स्पष्ट किया कि अमेरिका एक संप्रभु राष्ट्र है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हमेशा वही फैसले लेते हैं जो अमेरिकी नागरिकों के हित में हों।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की 5 बड़ी बातें:
* ‘साउथ पार्स’ पर अकेले किया हमला: नेतन्याहू ने स्वीकार किया कि ईरान के विशाल साउथ पार्स (South Pars) गैस फील्ड के असलुयेह (Asaluyeh) कॉम्प्लेक्स पर हमला इजरायल ने अकेले किया था। उन्होंने कहा कि “हमने यह कदम अपनी सुरक्षा के लिए उठाया था और अमेरिका को इसकी पहले से जानकारी नहीं थी।”
* ट्रंप के अनुरोध पर ‘युद्ध विराम’: प्रधानमंत्री ने पुष्टि की कि राष्ट्रपति ट्रंप ने उनसे भविष्य में गैस ठिकानों पर और हमले न करने का अनुरोध किया है। नेतन्याहू ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने मुझसे इसे रोकने को कहा और मैं उनके अनुरोध का सम्मान करते हुए फिलहाल इन ठिकानों पर हमले टाल रहा हूँ।”
* ईरान की शक्ति ‘खत्म’ होने का दावा: नेतन्याहू ने दावा किया कि 20 दिनों के भीषण युद्ध के बाद अब ईरान के पास यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) या बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की कोई क्षमता नहीं बची है। उन्होंने कहा कि ईरान का रक्षा तंत्र अब ‘बेअसर’ हो चुका है।
* अमेरिका-इजरायल तालमेल: नेतन्याहू ने दोनों देशों के बीच के समन्वय की तारीफ करते हुए कहा कि इतिहास में कभी भी दो नेता (ट्रंप और नेतन्याहू) इतने अधिक तालमेल में नहीं रहे। उन्होंने कहा, “ट्रंप नेता हैं और मैं उनका सहयोगी हूँ, हम मिलकर दुनिया को ईरान के खतरे से बचा रहे हैं।”
* ईरानी जनता से अपील: उन्होंने एक बार फिर ईरान के लोगों से अपील की कि वे इस शासन के खिलाफ खड़े हों और अपने भाग्य का फैसला खुद करें।
क्यों मचा है घमासान?
हाल ही में इजरायल द्वारा ईरान के गैस ठिकानों पर किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने कतर, यूएई और सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया है। इससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें $115 प्रति बैरल के पार चली गई हैं और दुनिया भर में ऊर्जा संकट का खतरा पैदा हो गया है।
विशेषज्ञ का नज़रिया: नेतन्याहू का यह बयान अमेरिकी घरेलू राजनीति में उठ रहे उन सवालों को शांत करने की कोशिश है, जिनमें ट्रंप प्रशासन पर इजरायल के इशारे पर युद्ध लड़ने के आरोप लग रहे थे।
