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ईरान को दोहरा झटका: इजरायल-अमेरिकी एयरस्ट्राइक में IRGC जनरल अली मोहम्मद नइनी ढेर; मौत से ठीक पहले दिया था ‘मिसाइल’ वाला बयान

ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध अब और भी भीषण हो गया है। ईरानी सेना (IRGC) के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक, अली मोहम्मद नइनी की मौत की पुष्टि के साथ ही खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है।

ईरान को दोहरा झटका: इजरायल-अमेरिकी एयरस्ट्राइक में IRGC जनरल अली मोहम्मद नइनी ढेर; मौत से ठीक पहले दिया था ‘मिसाइल’ वाला बयान

तेहरान/यरूशलेम: मिडिल ईस्ट में जारी महायुद्ध के बीच ईरान के सैन्य नेतृत्व को एक और अपूरणीय क्षति हुई है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उनके वरिष्ठ जनरल और मुख्य प्रवक्ता अली मोहम्मद नइनी (Ali Mohammad Naeni) एक संयुक्त इजरायली-अमेरिकी हवाई हमले में मारे गए हैं।

कैसे हुआ हमला? (ताजा अपडेट)

खुफिया सूत्रों के अनुसार, यह एयरस्ट्राइक ईरान के एक रणनीतिक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाकर की गई थी, जहाँ जनरल नइनी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। इजरायल और अमेरिका की वायुसेना ने समन्वय के साथ इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ को अंजाम दिया, जिससे ईरान का रक्षा तंत्र पूरी तरह हिल गया है।

मौत से पहले का आखिरी संदेश: “मिसाइलें बनना नहीं रुकेंगी”

अपनी मौत से कुछ ही समय पहले जनरल नइनी ने एक कड़ा बयान जारी किया था, जिसे अब उनकी ‘वसीयत’ के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने गर्व से कहा था:

“ईरान की मिसाइल शक्ति पर कोई आंच नहीं आई है। हमारा देश लगातार नई और घातक मिसाइलें बना रहा है और इस उत्पादन प्रक्रिया में रत्ती भर भी कमी नहीं आई है।”

नइनी का यह बयान इजरायल के उन दावों का जवाब था, जिसमें कहा गया था कि हवाई हमलों ने ईरान की मिसाइल निर्माण क्षमता को नष्ट कर दिया है।

क्यों अहम थे अली मोहम्मद नइनी?

* IRGC का चेहरा: नइनी न केवल एक जनरल थे, बल्कि IRGC के मुख्य प्रवक्ता के रूप में ईरान के ‘नैरेटिव’ और मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) का नेतृत्व कर रहे थे।

* रणनीतिकार: वह ईरान के मिसाइल प्रोग्राम और क्षेत्रीय प्रोक्सी समूहों (जैसे हिजबुल्लाह और हूतियों) के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते थे।

* नेतृत्व का संकट: सर्वोच्च नेता खामेनेई और खुफिया मंत्री के बाद अब नइनी की मौत ने ईरान के सैन्य कमान ढांचे (Command Structure) में एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है।

पूरी दुनिया पर असर

सऊदी अरब, कतर और यूएई के गैस ठिकानों पर हुए हमलों के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल मौत ने युद्ध की आग में घी डालने का काम किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब अपने ‘प्रवक्ता’ की मौत का बदला लेने के लिए इजरायल या अमेरिकी ठिकानों पर बड़े मिसाइल हमले कर सकता है।

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