अन्तर्राष्ट्रीय

‘भयावह संकट की आहट’: सऊदी-कतर और UAE के गैस ठिकानों पर भीषण हमले, पूरी दुनिया में मचा हड़कंप

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर आ गया है। ओमान की खाड़ी और अरब सागर में जारी हलचल के बीच गैस ठिकानों पर हुए हमलों ने दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है।

‘भयावह संकट की आहट’: सऊदी-कतर और UAE के गैस ठिकानों पर भीषण हमले, पूरी दुनिया में मचा हड़कंप

दुबई/रियाद: मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी जंग अब समंदर से निकलकर दुनिया की ‘एनर्जी लाइफलाइन’ तक पहुँच गई है। बुधवार और गुरुवार (18-19 मार्च 2026) को सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के महत्वपूर्ण गैस और तेल ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों के बाद वैश्विक बाजारों में गैस की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है, जिससे पूरी दुनिया एक नए आर्थिक और ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है।

कहाँ-कहाँ हुए हमले?

* कतर (Ras Laffan): दुनिया के सबसे बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) हब ‘रास लफ्फान’ पर मिसाइल हमले हुए हैं। कतर एनर्जी के मुताबिक, इन हमलों से प्लांट को “व्यापक नुकसान” पहुँचा है और फिलहाल उत्पादन रोक दिया गया है।

* UAE (Habshan): अबू धाबी के हब्शान गैस क्षेत्र को निशाना बनाने की कोशिश की गई, जिसके बाद सुरक्षा कारणों से यहाँ ऑपरेशंस बंद करने पड़े हैं।

* सऊदी अरब (Eastern Province): सऊदी रक्षा मंत्रालय ने पूर्वी प्रांत में गैस ठिकानों की ओर आ रहे कई ड्रोन्स और मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया है।

पूरी दुनिया क्यों डरी हुई है?

* गैस की किल्लत: कतर अकेले दुनिया की 20% LNG सप्लाई करता है। यहाँ सप्लाई रुकने का मतलब है कि यूरोप और एशिया के कई देशों में बिजली और ईंधन का संकट पैदा हो सकता है।

* स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खतरा: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाला व्यापार लगभग ठप हो गया है, जहाँ से दुनिया का एक-तिहाई समुद्री तेल गुजरता है।

* भारत पर असर: भारत अपनी जरूरत की बड़ी मात्रा में गैस कतर और यूएई से आयात करता है। इन ठिकानों पर हमले से भारत में CNG और PNG की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है।

इंडियन नेवी अलर्ट पर

हालात की गंभीरता को देखते हुए भारतीय नौसेना ने अरब सागर और ओमान की खाड़ी में अपने युद्धपोतों की गश्त बढ़ा दी है, ताकि भारतीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

विशेषज्ञों की चेतावनी: यदि यह संघर्ष और फैला, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को संभालना मुश्किल होगा। यह न केवल एक क्षेत्रीय युद्ध है, बल्कि एक वैश्विक ऊर्जा युद्ध में बदलता जा रहा है।

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