लालू-राबड़ी को कोर्ट का झटका: लैंड-फॉर-जॉब्स केस में ‘अनरिलायड’ दस्तावेजों की मांग खारिज
लैंड-फॉर-जॉब्स (Land-for-Jobs) मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगा है। अदालत ने उनकी उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने जांच एजेंसी द्वारा जब्त किए गए ‘गैर-आश्रित’ (Non-Reliable) दस्तावेजों की मांग की थी।
यहाँ इस अदालती फैसले की मुख्य बातें और कोर्ट की कड़ी टिप्पणियां दी गई हैं:
लालू-राबड़ी को कोर्ट का झटका: लैंड-फॉर-जॉब्स केस में ‘अनरिलायड’ दस्तावेजों की मांग खारिज; जज बोले— “मुकदमे को भूलभुलैया में धकेलने की कोशिश”
नई दिल्ली: विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने बुधवार को एक 35 पन्नों का विस्तृत आदेश जारी करते हुए लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और अन्य आरोपियों की दलीलों को ‘अस्वीकार्य’ करार दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया को आरोपियों की शर्तों पर नहीं चलाया जा सकता।
1. क्या हैं ‘अनरिलायड’ दस्तावेज और विवाद?
‘अनरिलायड’ या गैर-आश्रित दस्तावेज वे सामग्री होती हैं जिन्हें जांच एजेंसियां (जैसे CBI या ED) छापेमारी के दौरान जब्त तो करती हैं, लेकिन आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल करते समय उन पर भरोसा नहीं करतीं।
* आरोपियों की मांग: लालू यादव और अन्य आरोपियों ने मांग की थी कि बचाव की तैयारी के लिए उन्हें ये सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं।
* कोर्ट का फैसला: जज ने कहा कि आरोपियों का हर दस्तावेज पाने का अधिकार नहीं है। पहले अभियोजन (Prosecution) को अपने सबूत पेश करने दिए जाएं, उसी के आधार पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।
2. कोर्ट की कड़ी टिप्पणियां: “उलटी गंगा बहाने जैसा”
न्यायाधीश विशाल गोगने ने याचिका खारिज करते हुए सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया:
* भूलभुलैया: कोर्ट ने कहा कि इन याचिकाओं का उद्देश्य मुकदमे को शुरुआत में ही “पेचीदगियों की भूलभुलैया” में धकेलना है।
* कार्यवाही लंबी खींचने का इरादा: आदेश में कहा गया कि ऐसा प्रतीत होता है कि आवेदकों का गुप्त इरादा न्यायिक कार्यवाही को लंबा खींचना है।
* शर्त मंजूर नहीं: कोर्ट ने साफ किया कि आरोपी जिरह शुरू करने के लिए दस्तावेजों की उपलब्धता को एक ‘शर्त’ के रूप में पेश नहीं कर सकते।
3. अन्य किनकी याचिकाएं हुई रद्द?
लालू-राबड़ी के अलावा कोर्ट ने दो अन्य प्रमुख आरोपियों की अर्जी भी ठुकरा दी:
* आर.के. महाजन: लालू प्रसाद के निजी सचिव (PS)।
* महीप कपूर: रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक (GM)।
महीप कपूर ने ऐसे 23 दस्तावेजों की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया को “व्यवस्थित से अव्यवस्थित” करने वाला कदम बताया।
4. आगे क्या होगा?
अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपियों को पहले ही उन दस्तावेजों का निरीक्षण (Inspection) करने का पर्याप्त अवसर दिया गया था जो मुख्य साक्ष्यों का हिस्सा नहीं हैं। याचिका खारिज होने से आरोपियों के अधिकारों का कोई हनन नहीं हो रहा है। अब मामला गवाहों की पेशी और अभियोजन के साक्ष्यों की ओर बढ़ेगा।
केस बैकग्राउंड: यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी के पदों पर नौकरी देने के बदले उम्मीदवारों से जमीन लिखवाई गई थी।
