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Movie Review: ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ – रणवीर सिंह का रौद्र रूप और आदित्य धर की ऐतिहासिक ‘डॉक्यू-ड्रामा’ रिसर्च

Movie Review: ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ – रणवीर सिंह का रौद्र रूप और आदित्य धर की ऐतिहासिक ‘डॉक्यू-ड्रामा’ रिसर्च

स्टार कास्ट: रणवीर सिंह, संजय दत्त, आर. माधवन, अर्जुन रामपाल, सारा अर्जुन और राकेश बेदी

निर्देशक: आदित्य धर

रेटिंग: ★★★ (3/5)

रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ (2025) ने न केवल बॉक्स ऑफिस के समीकरण बदले थे, बल्कि 1400 करोड़ रुपये का लाइफटाइम कलेक्शन कर भारतीय सिनेमा की तीसरी सबसे बड़ी फिल्म बनने का गौरव हासिल किया था। अब, 19 मार्च 2026 को इसके बहुप्रतीक्षित सीक्वल ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ की रिलीज के साथ उम्मीदों का पहाड़ आदित्य धर के कंधों पर है। 18 मार्च को हुए प्री-रिलीज शोज के आधार पर, यहाँ फिल्म का विस्तृत विश्लेषण है।

कहानी: बदले की आग और लियारी का नया सुल्तान

फिल्म की शुरुआत जसकीरत सिंह रांगी (रणवीर सिंह) के पावरफुल बैकग्राउंड के साथ होती है। रणवीर ने पहले ही फ्रेम से यह साबित कर दिया है कि यह किरदार उनके करियर के सबसे महत्वपूर्ण किरदारों में से एक है।

* रणवीर का फौजी बनने का सपना: जसकीरत एक फौजी बनकर देश की सेवा करना चाहता है, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर है। उसके परिवार पर हुए भीषण अत्याचार की कहानी फिल्म के शुरुआती 30 मिनटों को भावनात्मक बनाती है।

* अपराध की दुनिया का उदय: प्रतिशोध की आग में जलता हुआ जसकीरत कानून हाथ में लेता है और उसे जेल जाना पड़ता है। यहीं से एक देशभक्त का रास्ता ‘किंग ऑफ लियारी’ बनने की ओर मुड़ जाता है। फिल्म में रहमान डकैत और अरशद पप्पू जैसे किरदारों के जरिए अंडरवर्ल्ड के काले इतिहास को बुना गया है। दिलचस्प बात यह है कि फिल्म में अतीक अहमद के हमशक्ल की एंट्री कहानी में एक अलग स्तर का यथार्थ (Realism) जोड़ती है।

आदित्य धर का डायरेक्शन: फिल्म या ऐतिहासिक दस्तावेज?

आदित्य धर ने ‘उरी’ के बाद एक बार फिर अपनी जबरदस्त रिसर्च का लोहा मनवाया है। इस बार उन्होंने फिल्म को सिर्फ एक एक्शन ड्रामा तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे भारतीय आधुनिक इतिहास के रहस्यों को खोलने वाली एक खिड़की बना दिया है।

* नोटबंदी का ‘असली’ राज: निर्देशक ने साहस दिखाते हुए फिल्म के जरिए भारत में नोटबंदी की असली वजह का खुलासा करने की कोशिश की है। यह हिस्सा इतना सघन और जानकारीपूर्ण है कि दर्शकों को कुछ समय के लिए महसूस होता है कि वे फिल्म नहीं, बल्कि एक उच्च स्तरीय डॉक्यूमेंट्री देख रहे हैं।

* पॉलिटिकल थ्रिलर: धर ने भारत की कई अहम घटनाओं को एक काल्पनिक कहानी के साथ इतनी बारीकी से जोड़ा है कि वह दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है। उनकी ‘नॉलेज’ और ‘रिसर्च’ फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष बनकर उभरी है।

परफॉर्मेंस और किरदार

* रणवीर सिंह: पूरी फिल्म रणवीर के कंधों पर टिकी है। उनका ट्रांसफॉर्मेशन—एक मासूम लड़के से खूंखार गैंगस्टर तक—काबिले तारीफ है। हालांकि, फिल्म के दूसरे हाफ में वह शुरुआती 15-20 मिनट वाला ‘स्वैग’ थोड़ा मिसिंग लगता है।

* सह-कलाकार: संजय दत्त और अर्जुन रामपाल ने अपने किरदारों में जान फूंकी है। आर. माधवन की मौजूदगी फिल्म की गहराई को बढ़ाती है, जबकि सारा अर्जुन ने अपनी एक्टिंग से प्रभावित किया है।

कमजोर कड़ियां: पेस और मेलोड्रामा

जहाँ पहला पार्ट अपनी तेज रफ़्तार और ‘स्वैग’ के लिए जाना गया, वहीं ‘धुरंधर 2’ कुछ जगहों पर भटकती हुई नजर आती है:

* खींचा हुआ एक्शन: इंटरवल के बाद एक्शन सीक्वेंस काफी लंबे हो जाते हैं, जो फिल्म की गति को धीमा करते हैं।

* सस्पेंस का फीकापन: फिल्म में जिस ‘बड़े साब’ (दाऊद इब्राहिम का संदर्भ) का रहस्य पूरी फिल्म में बना रहता है, उसका अंत काफी साधारण और खोखला महसूस होता है।

* मेलोड्रामा का अधिक होना: फिल्म में इमोशनल सीन जरूरत से ज्यादा लंबे हैं, जिससे पहली फिल्म जैसी ‘क्रिस्पनेस’ गायब दिखती है।

निष्कर्ष: क्या आपको यह फिल्म देखनी चाहिए?

‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ केवल एक मसाला फिल्म नहीं है; यह इतिहास, राजनीति और बदले की एक जटिल कहानी है। यदि आप रणवीर सिंह के फैन हैं और भारतीय इतिहास की गुत्थियों को एक नए नजरिए से देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए है। हालांकि, पहले पार्ट की तरह यह पूरी तरह ‘एंटरटेनर’ नहीं है, बल्कि यह आपको सोचने पर मजबूर करने वाली एक गंभीर ‘नॉलेज वाली फिल्म’ है।

 

Final Verdict: सिनेमाई चमक और ऐतिहासिक रहस्यों का अनूठा मेल, जिसे एक बार देखना तो बनता है।

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