‘KD: The Devil’ के विवादित गाने पर CBFC का बड़ा धमाका, मेकर्स की बढ़ी मुश्किलें!
‘KD: The Devil’ के विवादित गाने पर CBFC का बड़ा धमाका, मेकर्स की बढ़ी मुश्किलें!
केवीएन प्रोडक्शन्स की बहुप्रतीक्षित कन्नड़ पैन-इंडिया फिल्म ‘केडी: द डेविल’ (KD: The Devil) इन दिनों अपनी कहानी से ज्यादा अपने एक गाने को लेकर सुर्खियों में है। फिल्म का गाना ‘सरके चुनर तेरी सरके’ (Sarke Chunar Teri Sarke) रिलीज होते ही विवादों के भंवर में फंस गया, जिसके बाद मेकर्स को इसे सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से हटाना पड़ा। अब इस पूरे मामले में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है।
सेंसर बोर्ड का कड़ा रुख: “हमें नहीं मिला कोई आवेदन”
गाने के बोल और चित्रण को लेकर उठ रहे सवालों के बीच CBFC के अध्यक्ष ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है। बोर्ड ने साफ तौर पर कहा है कि इस गाने के सर्टिफिकेशन के लिए उनके पास कोई एप्लीकेशन नहीं आई थी।
बोर्ड ने अपने बयान में कहा:
“यह स्पष्ट किया जाता है कि सीबीएफसी को ‘सरके चुनर तेरी सरके’ के प्रमाणीकरण हेतु कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। अक्सर यह भ्रम रहता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट भी हमारे द्वारा प्रमाणित है, जबकि ऐसा नहीं है। डिजिटल सामग्री सीबीएफसी के दायरे में नहीं आती। बिना वजह बोर्ड का नाम ऐसे विवादों में घसीटना गलत है।”
नोरा फतेही ने पहले ही दी थी चेतावनी
दिलचस्प बात यह है कि गाने में नजर आने वाली एक्ट्रेस नोरा फतेही ने भी इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। नोरा के अनुसार, उन्होंने इस गाने का कन्नड़ वर्जन करीब 3 साल पहले शूट किया था। जब उन्होंने इसका हिंदी वर्जन सुना, तो उन्हें इसके बोलों पर आपत्ति थी। नोरा ने मेकर्स को पहले ही आगाह कर दिया था कि इसके हिंदी लिरिक्स से विवाद पैदा हो सकता है। गाना हटाए जाने पर एक्ट्रेस ने संतोष व्यक्त किया है।
क्यों हुआ बवाल?
14 मार्च को रिलीज हुए इस गाने में संजय दत्त और नोरा फतेही की केमिस्ट्री दिखाई गई थी। हालांकि, दर्शकों ने गाने के ‘डबल मीनिंग’ (द्विअर्थी) और ‘भद्दे’ बोलों पर कड़ी आपत्ति जताई। सोशल मीडिया पर इसे भारतीय संस्कृति और महिलाओं के चित्रण के खिलाफ बताते हुए डिलीट करने की मांग उठने लगी थी।
फिल्म के बारे में खास बातें
‘केडी: द डेविल’ एक बड़े बजट की कन्नड़ फिल्म है जिसमें ध्रुव सरजा मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म की स्टार कास्ट काफी तगड़ी है:
* संजय दत्त (विलेन/अहम भूमिका)
* शिल्पा शेट्टी
* वी रविचंद्रन
* जिशु सेनगुप्ता
निष्कर्ष: डिजिटल युग में ‘पैन-इंडिया’ फिल्मों के लिए यह एक बड़ी सीख है कि केवल भाषा बदलना काफी नहीं है, बल्कि शब्दों की मर्यादा और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना भी अनिवार्य है।
