राष्ट्रीय

अयोध्या में सैकड़ों साल पुरानी हाथ से लिखी रामायण: राम कथा म्यूजियम में रखी जाएगी 233 साल पुरानी दुर्लभ पांडुलिपि

अयोध्या में सैकड़ों साल पुरानी हाथ से लिखी रामायण: राम कथा म्यूजियम में रखी जाएगी 233 साल पुरानी दुर्लभ पांडुलिपि

राम नगरी अयोध्या को मिली एक बड़ी सांस्कृतिक सौगात! महर्षि वाल्मीकि की रामायण की एक 233 साल पुरानी दुर्लभ संस्कृत पांडुलिपि (हाथ से लिखी मैन्युस्क्रिप्ट) को अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय (Ram Katha Museum) में स्थायी रूप से रखा जा रहा है। यह अमूल्य धरोहर जनवरी 2026 में संस्कृति मंत्रालय के तहत भेंट की गई थी और अब म्यूजियम में प्रदर्शित होने वाली है, जहां श्रद्धालु और शोधकर्ता इसे करीब से देख सकेंगे।

मुख्य बातें इस पांडुलिपि की:

उम्र: 233 साल पुरानी (1792 ईस्वी में लिखी गई, विक्रम संवत 1849 के अनुसार)।

भाषा और लिपि: संस्कृत में देवनागरी लिपि से हाथ से लिखी गई।

विशेष: इसमें तत्त्वदीपिकाटीका टीका (व्याख्या) शामिल है, जो महेश्वर तीर्थ द्वारा लिखी गई है। यह रामायण के मुख्य 5 कांडों को कवर करती है।

पहले कहां थी: यह पहले राष्ट्रपति भवन में लोन पर रखी गई थी, अब स्थायी रूप से अयोध्या ट्रांसफर कर दी गई है।

भेंट किसने की: केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने प्रधानमंत्री संग्रहालय और लाइब्रेरी के एग्जीक्यूटिव काउंसिल चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र को सौंपी, जो राम मंदिर निर्माण समिति के भी चेयरमैन हैं।

राम कथा संग्रहालय (तुलसी स्मारक भवन के पास, राम मंदिर से करीब 4 किमी दूर) में यह पांडुलिपि एक प्रमुख आकर्षण बनेगी। म्यूजियम में पहले से ही रामायण से जुड़ी कई दुर्लभ वस्तुएं, गैलरीज़ और हाई-टेक प्रदर्शनियां हैं — जैसे रामायण वैक्स म्यूजियम (दुनिया का पहला) भी पास में तैयार है। सरकार ज्ञान भारतम मिशन के तहत ऐसी और दुर्लभ रामायण पांडुलिपियों को इकट्ठा कर डिजिटाइज कर रही है, ताकि वैश्विक स्तर पर उपलब्ध हों।

यह घटना अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत कर रही है, खासकर राम मंदिर के बाद। भक्तों के लिए यह राम भक्ति और भारतीय इतिहास का जीवंत प्रमाण बनेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *