ISIS से जुड़े BDS छात्र हारिस अली की ‘कुंडली’: शिक्षित परिवार और आतंकी राह
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में डेंटल की पढ़ाई कर रहे छात्र हारिस अली की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है। एक संभ्रांत और शिक्षित परिवार से ताल्लुक रखने वाले इस छात्र का आतंकी संगठन ISIS से जुड़ाव सामने आना चिंता का विषय बन गया है।
हारिस अली की ‘कुंडली’: शिक्षित परिवार और आतंकी राह
मुरादाबाद के एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में BDS (द्वितीय वर्ष) के छात्र हारिस अली को उत्तर प्रदेश ATS ने रविवार को गिरफ्तार किया। 19 वर्षीय हारिस मूल रूप से सहारनपुर के मानक मऊ इलाके का रहने वाला है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि (Family Background)
हारिस का परिवार समाज में अच्छी पहचान रखता है और आर्थिक रूप से संपन्न है:
* पिता: हारिस के पिता एक प्रतिष्ठित निजी कंपनी में कार्यरत हैं।
* भाई-बहन: हारिस के भाई और बहन दोनों डॉक्टर हैं। परिवार में शिक्षा का माहौल होने के बावजूद हारिस का झुकाव कट्टरपंथ की ओर हो गया।
* स्वभाव: सहपाठियों और शिक्षकों के अनुसार, हारिस कॉलेज में बेहद शांत और अनुशासित रहता था। वह ज्यादा घुलने-मिलने वाला छात्र नहीं था, जिससे किसी को उसकी संदिग्ध गतिविधियों पर शक नहीं हुआ।
आतंकी मॉड्यूल और ISIS कनेक्शन
ATS की जांच में हारिस अली के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
* सोशल मीडिया नेटवर्क: हारिस इंस्टाग्राम, Session और Discord जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए ISIS के हैंडलरों के संपर्क में था। वह भारत, पाकिस्तान और अन्य देशों में बैठे आकाओं से जुड़ा हुआ था।
* Al-Ittihad Media Foundation: हारिस ने भारत में ISIS के एजेंडे को फैलाने के लिए अपना एक अलग ग्रुप ‘अल-इत्तिहाद मीडिया फाउंडेशन’ बनाया था।
* कट्टरपंथ का प्रचार: वह इन ग्रुप्स पर ISIS के लड़ाकों के वीडियो, प्रोपेगैंडा मैगजीन (Dabiq और Al-Naba) और कट्टरपंथी भाषण साझा करता था।
* मकसद: पूछताछ के दौरान हारिस ने कथित तौर पर बताया कि वह लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास नहीं रखता और भारत में ‘शरिया आधारित खिलाफत’ स्थापित करना चाहता था।
गिरफ्तारी और कार्रवाई
UP ATS ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और खुफिया इनपुट के आधार पर हारिस को मुरादाबाद से गिरफ्तार किया। पुलिस अब उन अन्य लोगों की तलाश कर रही है जो हारिस द्वारा बनाए गए ऑनलाइन ग्रुप्स का हिस्सा थे और कट्टरपंथ की ओर बढ़ रहे थे।
“हारिस अली छद्म नामों (Pseudonyms) और VPN का उपयोग करके अपनी पहचान छुपाता था और युवाओं को कट्टरपंथी बनाने (Radicalization) के काम में लगा था— UP ATS अधिकारी
