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नेपाल को मिली पहली ट्रांसजेंडर महिला सांसद: कैलाश से भूमिका श्रेष्ठ बनने की प्रेरणादायक कहानी

नेपाल को मिली पहली ट्रांसजेंडर महिला सांसद: कैलाश से भूमिका श्रेष्ठ बनने की प्रेरणादायक कहानी

काठमांडू, 17 मार्च 2026: नेपाल के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हो गया जब भूमिका श्रेष्ठ (37 वर्षीय) ने नेपाल की पहली ट्रांसजेंडर महिला सांसद के रूप में शपथ ली। नेपाल निर्वाचन आयोग ने सोमवार को उन्हें राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (RSP) से प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन (PR) के तहत प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) की सदस्य के रूप में आधिकारिक रूप से मान्यता दी। RSP ने हालिया चुनावों में 182 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया था।

भूमिका श्रेष्ठ ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं बहुत उत्साहित हूं, लेकिन मेरे कंधों पर जिम्मेदारी का बोझ भी महसूस हो रहा है। हमारा समुदाय मुझसे अपेक्षा करता है कि मैं संसद में उनकी आवाज उठाऊं।” नेपाल में 9 लाख से ज्यादा लोग सेक्शुअल माइनॉरिटी के रूप में पहचाने जाते हैं, और देश दक्षिण एशिया में LGBTQ+ अधिकारों के मामले में सबसे प्रगतिशील माना जाता है।

कैलाश से भूमिका तक का सफर:

भूमिका का जन्म काठमांडू में कैलाश श्रेष्ठ के नाम से हुआ था। वे पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे थे और बचपन से ही जेंडर आइडेंटिटी से जुड़े संघर्ष झेलते रहे। स्कूल में बुलिंग और अपमान के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी। युवावस्था में उन्होंने अपनी असली पहचान को अपनाया और भूमिका नाम रखा।

2007 में नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया कि व्यक्ति खुद को ‘थर्ड जेंडर’ के रूप में पहचान सकते हैं। भूमिका ने ब्लू डायमंड सोसाइटी (BDS) के साथ मिलकर अभियान चलाया, जिसके बाद 2015 में उन्होंने अपने नागरिकता प्रमाणपत्र में जेंडर को ‘थर्ड जेंडर’ में बदलवाया। वे नेपाल की पहली ट्रांसजेंडर व्यक्ति थीं जिन्होंने ‘O’ (अदर) मार्क वाले पासपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय यात्रा की (2015 में ताइवान यात्रा)।

भूमिका एक प्रमुख LGBTQ+ एक्टिविस्ट, अभिनेत्री और मिस पिंक प्रतियोगिता की विजेता भी रह चुकी हैं। 2019 में उन्हें ग्लोबल पॉलिसी में 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया गया था, जहां उनका नाम एम्मा वॉटसन और मिशेल ओबामा के साथ आया।

यह उपलब्धि नेपाल के LGBTQ+ समुदाय के लिए गर्व का विषय है, जहां ट्रांसजेंडर लोगों को अक्सर सामाजिक बहिष्कार, बेरोजगारी और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। RSP की इस पहल से संसद में विविधता बढ़ी है, और उम्मीद है कि भूमिका ट्रांसजेंडर अधिकारों, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसी मुद्दों पर मजबूत आवाज उठाएंगी।

नेपाल की यह जीत दक्षिण एशिया में ट्रांस अधिकारों की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है!

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