डूरंड लाइन पर गहराता संकट: क्या पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच छिड़ गई है अघोषित जंग?
डूरंड लाइन पर पाकिस्तान और अफगानिस्तान (तालिबान शासन) के बीच तनाव अब खुले युद्ध की शक्ल ले चुका है। फरवरी 2026 के अंत से शुरू हुई यह जंग मार्च के मध्य तक और तेज हो गई है, जहां दोनों तरफ से एयरस्ट्राइक्स, ड्रोन हमले, आर्टिलरी फायर और ग्राउंड क्लैशेस हो रहे हैं। दोनों देश एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं कि वे सीमा पार से आतंकी गतिविधियां बढ़ावा दे रहे हैं, खासकर Tehrik-e-Taliban Pakistan (TTP) के ठिकानों को लेकर।
घटनाक्रम कुछ इस तरह रहा:
फरवरी 21-22, 2026: पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांतों—नंगरहार, पक्तिका और खोस्त—में TTP और ISIS-K के कैंपों पर एयरस्ट्राइक्स किए। पाकिस्तान का दावा था कि ये हमले हाल के आतंकी हमलों (जैसे बाजौर, बन्नू) का जवाब थे।
फरवरी 26: तालिबान ने जवाबी कार्रवाई में डूरंड लाइन के कई सेक्टर्स पर बड़े पैमाने पर हमला किया। उन्होंने पाकिस्तानी पोस्ट्स पर ड्रोन और ग्राउंड अटैक किए, दावा किया कि 19 से ज्यादा पाकिस्तानी आउटपोस्ट कब्जे में लिए और दर्जनों सैनिक मारे गए।
फरवरी 27: पाकिस्तान ने “ओपन वॉर” घोषित कर दिया। डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ ने कहा, “हमारी सब्र की हद पार हो चुकी है।” पाकिस्तान ने Operation Ghazab Lil Haq (राइटियस फ्यूरी) शुरू की, जिसमें काबुल, कंधार, पक्तिया समेत कई अफगान शहरों और ठिकानों पर एयर और ग्राउंड स्ट्राइक्स किए गए—कुछ रिपोर्ट्स में काबुल और कंधार एयरपोर्ट के पास फ्यूल डिपो पर हमले शामिल हैं।
मार्च 2026: क्लैशेस जारी—पाकिस्तान ने कंधार में मिलिटेंट हाइडआउट्स पर हमले किए, जबकि तालिबान ने पाकिस्तानी पोस्ट्स (जैसे जंदा पोस्ट, शोरबाक) कब्जे में लेने का दावा किया। हालिया रिपोर्ट्स में नॉर्थ वजीरिस्तान (मीरांशाह, आलम खान एरिया), बरमल (पक्तिका), जाजी अयूब (खोस्त) में भारी फायरिंग और फाइटिंग की खबरें हैं।
दोनों पक्षों के दावे:
पाकिस्तान: TTP अफगानिस्तान से ऑपरेट कर रहा है, तालिबान उसे शेल्टर दे रहा है। सैकड़ों TTP/तालिबान मिलिटेंट्स मारे गए।
अफगानिस्तान (तालिबान): पाकिस्तानी आक्रमण जवाबी थे, कई पाकिस्तानी पोस्ट्स कब्जे में लिए, 100+ सैनिक मारे गए। सिविलियन मौतें (बच्चों समेत) की शिकायत की।
यह संघर्ष डूरंड लाइन (1893 में ब्रिटिश द्वारा खींची गई 2600 किमी सीमा) की पुरानी विवाद को फिर उजागर कर रहा है—अफगानिस्तान इसे कभी मान्य नहीं करता, जबकि पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर मानता है। TTP की बढ़ती गतिविधियां (2025 में 1200+ मौतें पाकिस्तान में) और बॉर्डर फेंसिंग पर झड़पें ट्रिगर बने।
क्षेत्रीय प्रभाव: मिडिल ईस्ट में ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के बीच यह नया फ्रंट साउथ एशिया की अस्थिरता बढ़ा रहा है। दोनों तरफ दर्जनों मौतें, सिविलियन प्रभावित, और डी-एस्केलेशन की कोई स्पष्ट राह नहीं दिख रही। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर बातचीत नहीं हुई तो बड़ा युद्ध या हाइब्रिड कॉन्फ्लिक्ट (मिलिटेंसी + इकोनॉमिक प्रेशर) लंबा खिंच सकता है।
शांति की गुहार लग रही है, लेकिन डूरंड लाइन की आग अभी बुझने के आसार नहीं दिख रहे। क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव काम करेगा? समय बताएगा।
