ईरान युद्ध के बीच सोने-चांदी के दाम स्थिर क्यों? बाजार का अनोखा खेल निवेशकों को हैरान कर रहा!
ईरान युद्ध के बीच सोने-चांदी के दाम स्थिर क्यों? बाजार का अनोखा खेल निवेशकों को हैरान कर रहा!
मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध (जो फरवरी अंत से तेज हुआ है) के बावजूद सोने और चांदी की कीमतें अपेक्षित उछाल नहीं दिखा रही हैं। आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव में सोना “सेफ हेवन” एसेट के रूप में चमकता है, लेकिन इस बार बाजार अलग ही खेल खेल रहा है। मार्च 2026 के मध्य तक (15 मार्च के आसपास) कीमतें स्थिर से लेकर गिरावट की ओर झुकी हुई हैं, जिससे निवेशक चौंक गए हैं।
वैश्विक स्तर पर क्या हो रहा है?
युद्ध शुरू होने पर सोना शुरुआत में $5,296 से $5,423 प्रति औंस तक उछला था, लेकिन फिर 6% से ज्यादा गिरकर $5,085 तक पहुंच गया।
अब कीमतें $5,050 से $5,200 के बीच घूम रही हैं – यानी शुरुआती उछाल के बाद स्थिरता या मामूली गिरावट।
चांदी भी पहले उछली, लेकिन फिर $80-90 के बीच उतार-चढ़ाव के साथ दबाव में है।
कारण: मजबूत अमेरिकी डॉलर (डॉलर इंडेक्स में तेजी), युद्ध से महंगाई की आशंका (तेल कीमतें $100 के ऊपर), और फेड द्वारा ब्याज दर कटौती की उम्मीदों में कमी। इससे सोने पर दबाव पड़ रहा है, क्योंकि मजबूत डॉलर में कीमती धातुएं महंगी लगती हैं।
भारत में आज के भाव (15 मार्च 2026 के आसपास)
24 कैरेट सोना: लगभग ₹1,58,000 से ₹1,60,000 प्रति 10 ग्राम (शहरों के हिसाब से थोड़ा अलग-अलग, जैसे दिल्ली-मुंबई में ₹1,58,399 तक रिपोर्टेड)।
22 कैरेट सोना: ₹1,45,000-₹1,48,000 प्रति 10 ग्राम।
चांदी: ₹2,60,000 से ₹2,85,000 प्रति किलो (हाल के दिनों में गिरावट देखी गई)।
MCX पर भी सोने-चांदी के फ्यूचर्स में उतार-चढ़ाव, लेकिन कोई बड़ा उछाल नहीं।
बाजार का “नया खेल” क्या है?
शॉर्ट-टर्म वॉर की उम्मीद: निवेशक मान रहे हैं कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है (ट्रंप प्रशासन की तरफ से “शॉर्ट एंड कंप्लीट” जैसे संकेत), इसलिए लंबे समय तक सेफ हेवन डिमांड नहीं बढ़ रही।
प्रॉफिट बुकिंग और इंस्टीट्यूशनल मूव: शुरुआती रैली के बाद बड़े निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं।
तेल vs. सोना: तेल कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन सोना उससे अलग चल रहा – महंगाई का डर ब्याज दरों पर असर डाल रहा है।
सेंट्रल बैंक डिमांड स्थिर: सेंट्रल बैंक अभी भी खरीद रहे हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है उछाल के लिए।
अन्य फैक्टर: ETFs से रिडेम्पशन और फिजिकल डिमांड में कमी (मिडिल ईस्ट ट्रेड प्रभावित)।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा या और फैला, तो सोना फिर से $5,400+ और भारत में ₹1.70 लाख+ प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है। लेकिन फिलहाल बाजार “वेट एंड वॉच” मोड में है – युद्ध की बजाय डॉलर और महंगाई पर नजर।
निवेशकों के लिए सलाह: ऐसे समय में लॉन्ग-टर्म होल्ड अच्छा रह सकता है, लेकिन शॉर्ट-टर्म में वोलेटिलिटी ज्यादा है। बाजार की यह अनोखी चाल बताती है कि पुराने नियम अब पूरी तरह लागू नहीं होते – नए फैक्टर जैसे डॉलर स्ट्रेंथ और फेड पॉलिसी ज्यादा प्रभावी हैं।
क्या आप सोना-चांदी में निवेश कर रहे हैं? या इंतजार कर रहे हैं? कमेंट में बताएं!
