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गगनयान मिशन की सुरक्षा कन्फर्म: DRDO ने ड्रोग पैराशूट का एक्सट्रीम लोड टेस्ट पास किया

नई दिल्ली/चंडीगढ़: भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की सुरक्षा में एक बड़ा कदम! DRDO ने ड्रोग पैराशूट (Drogue Parachute) का सफल क्वालिफिकेशन लेवल लोड टेस्ट पूरा कर लिया है। यह पैराशूट अंतरिक्ष से लौटते समय क्रू मॉड्यूल को स्थिर करता है और गति कम करता है, ताकि मुख्य पैराशूट सुरक्षित खुल सकें और अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित उतर सकें। टेस्ट 19 फरवरी 2026 को चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेज (RTRS) फैसिलिटी में किया गया।

टेस्ट की मुख्य बातें

टेस्ट का उद्देश्य: रियल फ्लाइट से ज्यादा लोड (एक्सट्रीम एयरोडायनामिक फोर्स) सिमुलेट करके पैराशूट की मजबूती और सेफ्टी मार्जिन चेक करना।

सफलता: टेस्ट में सभी ऑब्जेक्टिव पूरे हुए। पैराशूट ने हाई-स्पीड और एक्सट्रीम कंडीशंस में भी मजबूती दिखाई, जो अंतरिक्ष यात्रियों की जान बचाने के लिए जरूरी है।

सहयोग: ISRO (विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर – VSSC), DRDO (एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट – ADRDE) और TBRL की टीमों ने मिलकर किया।

गगनयान में पैराशूट सिस्टम: क्रू मॉड्यूल में कुल 10 पैराशूट (4 प्रकार) होते हैं—एपेक्स कवर सेपरेशन, ड्रोग, पायलट और मुख्य पैराशूट। ड्रोग पैराशूट सबसे पहले खुलता है और मॉड्यूल को स्टेबलाइज करता है।

महत्वपूर्ण बयान

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, ISRO और इंडस्ट्री को बधाई दी। कहा कि यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम है।

DRDO चेयरमैन और सेक्रेटरी डिफेंस R&D ने टीम को शुभकामनाएं दीं।

यह टेस्ट गगनयान के क्रू रिकवरी सिस्टम की मजबूती साबित करता है, जहां अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित वापसी के लिए पैराशूट पर पूरी तरह निर्भर होते हैं।

गगनयान मिशन अब और मजबूत हो गया है—2026-2027 में अनमैन्ड और फिर क्रूड मिशन की तैयारी तेज। भारत अब ह्यूमन स्पेसफ्लाइट में अपनी क्षमता साबित कर रहा है!

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