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निखिल गुप्ता कैसे फंसे अमेरिकी एजेंट के जाल में: 1 लाख डॉलर की सुपारी का खेल उल्टा पड़ गया

निखिल गुप्ता कैसे फंसे अमेरिकी एजेंट के जाल में: 1 लाख डॉलर की सुपारी का खेल उल्टा पड़ गया

न्यूयॉर्क: खालिस्तानी अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश में आरोपी भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने अमेरिकी अदालत में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। 54 वर्षीय गुप्ता ने शुक्रवार (13 फरवरी 2026) को मैनहट्टन की फेडरल कोर्ट में हत्या के लिए सुपारी देने, हत्या की साजिश रचने और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश के आरोपों में गिल्टी प्लेड किया।

यह मामला 2023 का है, जब अमेरिकी जांच एजेंसियों ने एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, निखिल गुप्ता ने एक भारतीय सरकारी कर्मचारी (विकास यादव) के निर्देश पर काम करते हुए न्यूयॉर्क में पन्नू की हत्या की योजना बनाई। हत्या के बदले कुल 1 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 84 लाख रुपये) की सुपारी तय हुई, जिसमें से 15 हजार डॉलर एडवांस के तौर पर दिए गए।

लेकिन यहां ट्विस्ट आया—जिसे गुप्ता और उनके साथी ‘हिटमैन’ (सुपारी किलर) समझ रहे थे, वह असल में अमेरिकी ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) का अंडरकवर अधिकारी था। गुप्ता ने एक व्यक्ति से संपर्क किया, जो DEA का कॉन्फिडेंशियल सोर्स (मुखबिर) था। इस मुखबिर ने उन्हें एक ‘हिटमैन’ से मिलवाया, जो DEA का गोपनीय अधिकारी निकला। पूरी बातचीत रिकॉर्ड की गई, और पैसे का लेन-देन भी अमेरिकी एजेंट्स के सामने हुआ।

इस स्टिंग ऑपरेशन से साजिश पूरी तरह बेनकाब हो गई। गुप्ता को जून 2023 में प्राग (चेक गणराज्य) से गिरफ्तार किया गया था, और जून 2024 में अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया। तब से वे ब्रुकलिन जेल में बंद हैं।

अदालत में गुप्ता ने माना कि उन्होंने एक व्यक्ति के साथ मिलकर अमेरिका में किसी की हत्या की साजिश रची और इसके लिए 15 हजार डॉलर का भुगतान किया। अमेरिकी अटॉर्नी जे क्लेटन ने कहा, “निखिल गुप्ता ने सोचा कि विदेश से बैठकर वे अमेरिका में किसी को मार सकते हैं बिना सजा के, सिर्फ फ्री स्पीच के अधिकार इस्तेमाल करने के लिए। लेकिन वे गलत थे।”

अब गुप्ता को 29 मई 2026 को सजा सुनाई जाएगी। इन आरोपों में अधिकतम 40 साल तक की जेल हो सकती है, हालांकि सेंटेंसिंग गाइडलाइंस के तहत 20-24 साल की सजा का अनुमान है।

यह केस भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव का कारण बना हुआ है, क्योंकि अमेरिकी पक्ष ने दावा किया कि साजिश भारतीय सरकार से जुड़ी थी, जबकि भारत ने इसे खारिज किया है। सजा के फैसले से मामले में नई मोड़ आ सकता है।

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