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आजमगढ़ के मौलाना शमशुल हुदा ने कैसे किया गड़बड़झाला? ED की रेड में हुआ बड़ा खुलासा

आजमगढ़ के मौलाना शमशुल हुदा ने कैसे किया गड़बड़झाला? ED की रेड में हुआ बड़ा खुलासा

लखनऊ/आजमगढ़: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर और आजमगढ़ जिलों में ब्रिटिश नागरिक मौलाना शमशुल हुदा खान के ठिकानों पर 11 फरवरी 2026 को छापेमारी की, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी फंडिंग का बड़ा खुलासा हुआ। मौलाना, जो मूल रूप से संत कबीर नगर के देवरिया लाल गांव के रहने वाले हैं और आजमगढ़ के एक अनुदानित मदरसे (दारुल उलूम अहले सुन्नत) में आलिया शिक्षक थे, पर आरोप है कि उन्होंने 2013 में भारतीय नागरिकता त्यागकर ब्रिटिश नागरिक बनने के बाद भी सरकारी वेतन और रिटायरमेंट बेनिफिट्स अवैध रूप से लिए।

ED के अनुसार, मौलाना ने 2007 से 2017 तक बिना अनुमति ब्रिटेन में रहते हुए मदरसे से सैलरी ली, मेडिकल लीव और सर्विस डॉक्यूमेंट्स अपडेट करवाए, और 2017 में वॉलंटरी रिटायरमेंट (VRS) लेकर फुल बेनिफिट्स हासिल किए। इसके अलावा, उन्होंने रजा फाउंडेशन और कुलियातुल बनातिर राजबिया एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी जैसे NGOs के जरिए विदेशी फंडिंग जुटाई, जो संदिग्ध रूप से पाकिस्तान-आधारित संगठनों (जैसे दावत-ए-इस्लामी) से जुड़े थे। जांच में ₹5.5 करोड़ के लेन-देन और ₹33 करोड़ की संपत्तियां (17 प्रॉपर्टीज) संत कबीर नगर में अचानक हासिल करने का खुलासा हुआ।

आजमगढ़ के मुबारकपुर में उनके अस्थाई आवास पर रेड में कई पहचान पत्र, धार्मिक किताबें और दस्तावेज बरामद हुए, जिनमें धर्मांतरण उकसाने और रेडिकल आइडियोलॉजी फैलाने के सबूत मिले। संत कबीर नगर के खलीलाबाद स्थित रजा मंजिल पर 15 घंटे से ज्यादा चली रेड में परिवार से पूछताछ की गई, मोबाइल जब्त किए गए। मौलाना वर्तमान में ब्रिटेन में हैं, लेकिन उनके बेटे तौसीफ रजा मौके पर नहीं मिले।

यह केस UP ATS की FIRs और पुलिस रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें विदेशी फंडिंग, NGO का दुरुपयोग और रेडिकल नेटवर्क से लिंक का आरोप है। ED ने PMLA के तहत मामला दर्ज किया है और बैंक अकाउंट्स, विदेशी निवेश की जांच जारी है। मौलाना ने 2017 UP चुनाव में भी वोट डाला था, जो नागरिकता नियमों का उल्लंघन दिखाता है।

यह खुलासा मदरसा फंडिंग, विदेशी प्रभाव और फ्रॉडुलेंट सरकारी बेनिफिट्स पर सवाल उठा रहा है। जांच आगे बढ़ रही है, और संपत्तियों पर कार्रवाई संभव है।

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