सरकार ने आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य किया: पूरे 6 छंद गाने होंगे, जन गण मन से पहले बजेगा, खड़े होना जरूरी
सरकार ने आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य किया: पूरे 6 छंद गाने होंगे, जन गण मन से पहले बजेगा, खड़े होना जरूरी
केंद्र सरकार ने भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के लिए नए और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय के 28 जनवरी 2026 (और कुछ रिपोर्ट्स में 6 फरवरी) के 10 पन्नों के आदेश के तहत अब सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और महत्वपूर्ण आधिकारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ का पूर्ण संस्करण (6 छंदों वाला, 3 मिनट 10 सेकंड का) बजाना या गाना अनिवार्य हो गया है। यह नियम राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले लागू होगा और उपस्थित सभी लोगों को खड़े होकर सम्मान देना होगा।
यह फैसला ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर आया है। पहले आमतौर पर सिर्फ पहले 2 छंद गाए जाते थे (1937 में नेहरू सरकार द्वारा धार्मिक संदर्भों के कारण छोड़े गए 4 छंदों को बहाल किया गया है)।
मुख्य नियम और प्रोटोकॉल क्या हैं?
पूर्ण संस्करण अनिवार्य: 6 छंदों वाला आधिकारिक वर्जन (3 मिनट 10 सेकंड) बजाना/गाना जरूरी। छोटा वर्जन अब नहीं चलेगा।
क्रम: अगर ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ दोनों बजते हैं, तो पहले राष्ट्रगीत (‘वंदे मातरम्’) और उसके बाद राष्ट्रगान (‘जन गण मन’)।
खड़े होना: सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ बजते समय सभी को खड़े होकर ध्यान मुद्रा में रहना अनिवार्य (राष्ट्रगान की तरह)।
किन मौकों पर अनिवार्य?
राष्ट्रीय ध्वज फहराने (झंडारोहण) के समय।
राष्ट्रपति/राज्यपाल के किसी आधिकारिक कार्यक्रम में आगमन और प्रस्थान पर।
राष्ट्रपति/राज्यपाल के भाषण या राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में।
सिविल सम्मान समारोह (जैसे पद्म अवॉर्ड्स)।
सरकारी/राज्य स्तर के अन्य औपचारिक आयोजन।
सरकारी स्कूलों के असेंबली में (दिन की शुरुआत में सामूहिक गायन संभव)।
आकाशवाणी/दूरदर्शन पर राष्ट्रपति के संबोधन से पहले/बाद में।
छूट: सिनेमा हॉल में फिल्मों के दौरान बजने पर खड़े होना अनिवार्य नहीं (दर्शकों की सुविधा के लिए)। निजी कार्यक्रमों या गैर-सरकारी आयोजनों पर लागू नहीं।
क्यों लिया गया यह फैसला?
‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान की तरह सम्मान और एकरूपता देने के लिए।
बैंकिम चंद्र चटर्जी की मूल रचना के पूर्ण रूप को बहाल करना (150 साल पूरे होने पर)।
पहले कोई फॉर्मल प्रोटोकॉल नहीं था, अब स्पष्ट नियम से सम्मान बढ़ेगा।
प्रतिक्रियाएं:
समर्थक इसे राष्ट्रभक्ति का मजबूत कदम बता रहे हैं।
कुछ विपक्षी आवाजों ने इसे “इतिहास की पुनर्लेखन” या “अनावश्यक” बताया, लेकिन ज्यादातर रिपोर्ट्स में सकारात्मक कवरेज है।
स्कूलों में लागू होने से बच्चों में राष्ट्रप्रेम बढ़ेगा, उम्मीद जताई जा रही है।
यह आदेश सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों और संवैधानिक संस्थाओं को भेजा गया है। अब सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा गान सुनना आम बात हो जाएगी। अपडेट्स के लिए बने रहें!
