अखिलेश यादव का EC-BJP पर तीखा प्रहार: मुस्लिम वोटर्स के नाम जानबूझकर काटे जा रहे, SIR को बताया ‘धांधली का खेल’
अखिलेश यादव का EC-BJP पर तीखा प्रहार: मुस्लिम वोटर्स के नाम जानबूझकर काटे जा रहे, SIR को बताया ‘धांधली का खेल’
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को लखनऊ में चुनाव आयोग (EC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में चल रही विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के तहत मुस्लिम मतदाताओं के वोट जानबूझकर काटे जा रहे हैं। अखिलेश ने कहा, “यह SIR नहीं है, बल्कि मुस्लिमों और पिछड़े-दलित-अल्पसंख्यक (PDA) समुदाय के वोटों को लक्षित करके काटने की साजिश है। भाजपा हार के बाद बदला ले रही है।”
अखिलेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबूत पेश करते हुए बताया कि फॉर्म-7 के जरिए एक ही व्यक्ति के नाम से सैकड़ों शिकायतें दर्ज की जा रही हैं, जिससे वोटर लिस्ट से नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद से गाजीपुर तक यह धांधली चल रही है, खासकर उन विधानसभा क्षेत्रों में जहां भाजपा लोकसभा चुनाव में हारी थी। सपा प्रमुख ने आंकड़े दिए कि प्रदेश में अब तक 1 करोड़ 99 हजार 710 वोट काटने की तैयारी है, जिसमें ज्यादातर मुस्लिम और PDA वोटर्स शामिल हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से फॉर्म-7 भरवाना तुरंत बंद करने की मांग की और कहा कि अगर आयोग निष्पक्ष नहीं रहा तो अपनी इमारत पर BJP का झंडा लगा ले।
अखिलेश ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की अपील की, ताकि अल्पसंख्यकों और PDA वोटर्स के नाम चुनावी सूची से हटाने की कोशिश रोकी जाए। उन्होंने BJP को ‘धांधलीजीवी पार्टी’ करार दिया और कहा कि लोकसभा चुनाव में हार के बाद BJP सत्ता हासिल करने के लिए हर हथकंडा अपना रही है। सपा ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग से शिकायत भी की है और दोषियों के खिलाफ FIR की मांग की है।
इस आरोप पर BJP की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह राजनीतिक स्टंट है। वहीं, विपक्षी दलों ने अखिलेश के आरोपों का समर्थन किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी विधानसभा चुनावों को प्रभावित कर सकता है, जहां वोटर लिस्ट की शुद्धता बड़ा मुद्दा बन सकती है। चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR प्रक्रिया पारदर्शी है और किसी भी शिकायत की जांच की जाएगी। यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, जहां अल्पसंख्यक वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
