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पलक, रिंकी, सीमा… 15 साल की नाबालिग को फर्जी शादीशुदा दिखाकर निकलवाए अंडाणु: प्रयागराज IVF रैकेट का खौफनाक सच

पलक, रिंकी, सीमा… 15 साल की नाबालिग को फर्जी शादीशुदा दिखाकर निकलवाए अंडाणु: प्रयागराज IVF रैकेट का खौफनाक सच

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक सनसनीखेज IVF रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जहां नाबालिग लड़कियों को लालच देकर अंडाणु (ओवा एक्सट्रैक्शन) निकालने का खेल चल रहा था। मुख्य आरोपी पलक हेला (19), उसकी मां रिंकी हेला (32), सीमा भारतीया (40), हिमांशु भारतीया (19) और कल्पना भारतीया (26) को पुलिस ने हिरासत में लिया है। ये सभी मिलकर सरोगेसी और IVF डोनेशन के नाम पर अवैध तरीके से नाबालिगों का शोषण कर रहे थे।

मामला फाफामऊ थाना क्षेत्र का है। पीड़िता की मां ने 6 फरवरी 2026 को शिकायत दर्ज कराई कि उनकी 15 साल की बेटी को पड़ोसी पलक और रिंकी ने बहला-फुसलाकर ले जाया। लड़की वेट्रेस का काम करती थी और पलक के साथ काम करती थी। आरोपियों ने उसे आईफोन और 10-15 हजार रुपये का लालच दिया, ताकि वह IVF डोनर बने।

रिंकी और पलक ने लड़की को सीमा भारतीया के पास पहुंचाया, जहां हिमांशु ने फर्जी आधार कार्ड बनाया। इसमें नाबालिग को 22 साल की बालिग और शादीशुदा दिखाया गया। फर्जी कंसेंट एफिडेविट भी तैयार किया गया। इसके बाद कल्पना भारतीया (IVF सेंटर की रजिस्टर्ड एजेंट) ने सिविल लाइंस स्थित इंदिरा IVF सेंटर में लड़की को भर्ती कराया। 20 जनवरी 2026 को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसका ओवा एक्सट्रैक्शन कर लिया गया। लड़की को सिर्फ 10 हजार रुपये दिए गए।

पुलिस जांच में पता चला कि यह रैकेट सिर्फ एक लड़की तक सीमित नहीं है। कई अन्य नाबालिगों पर भी ऐसा ही शोषण हुआ हो सकता है। डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया कि आरोपियों पर अपहरण, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज बनाने और POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई हो रही है। पीड़िता को शेल्टर होम में रखा गया है और उसका मेडिकल चेकअप किया जा रहा है।

यह मामला मेडिकल एथिक्स, बच्चों की सुरक्षा और IVF क्लीनिकों की निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस पूछताछ में और खुलासे होने की उम्मीद है। समाज में ऐसी घटनाएं मानव तस्करी और शोषण की गहरी जड़ों को उजागर करती हैं।

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