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भारत की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता: MEA ने साफ किया, रूस-वेनेजुएला से तेल आयात पर कोई समझौता नहीं, 1.4 अरब भारतीयों का हित पहले!

भारत की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता: MEA ने साफ किया, रूस-वेनेजुएला से तेल आयात पर कोई समझौता नहीं, 1.4 अरब भारतीयों का हित पहले!

विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा 1.4 अरब नागरिकों की जरूरतों से ऊपर है और सरकार इस मुद्दे पर किसी भी बाहरी दबाव में नहीं आएगी। MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में रूस से तेल आयात और वैश्विक ऊर्जा बाजार की अस्थिरता पर सवालों के जवाब में कहा, “हमारी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता 1.4 अरब भारतीयों की एनर्जी सिक्योरिटी सुनिश्चित करना है। हम ऑब्जेक्टिव मार्केट कंडीशंस और बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल के हिसाब से अपने एनर्जी सोर्स को डाइवर्सिफाई कर रहे हैं।”

रूस अब सबसे बड़ा सप्लायर

जायसवाल ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2022 से रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है, जो कुल आयात का लगभग 40% हिस्सा देता है। इससे पहले भारत मुख्य रूप से सऊदी अरब और इराक जैसे मध्य पूर्वी देशों पर निर्भर था। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बावजूद भारत ने रियायती दरों पर रूसी क्रूड तेल खरीदना जारी रखा, क्योंकि यह आर्थिक रूप से फायदेमंद था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी था।

वेनेजुएला से पुराना रिश्ता

प्रवक्ता ने वेनेजुएला को लंबे समय से ऊर्जा साझेदार बताया। उन्होंने कहा, “2019-20 तक हम वेनेजुएला से कच्चा तेल आयात करते थे, लेकिन प्रतिबंधों के कारण रोकना पड़ा। 2023-24 में फिर शुरू किया, लेकिन नए प्रतिबंधों के बाद रोक दिया। हम वेनेजुएला सहित किसी भी स्रोत से कमर्शियल फायदे देखकर तेल खरीदने के लिए तैयार हैं।” यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने वेनेजुएला पर फिर से सख्त प्रतिबंध लगाए हैं।

बाहरी दबाव से नहीं प्रभावित

MEA ने साफ कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सम्मान करता है, लेकिन अपनी ऊर्जा नीति को किसी बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होने देगा। जायसवाल ने जोर दिया कि भारत की नीति संतुलित और स्वतंत्र है—न किसी एक देश पर निर्भर, न ही किसी गठबंधन की शर्तों पर। यह बयान पश्चिमी देशों (खासकर अमेरिका) के दबाव के बीच आया है, जहां रूस से तेल खरीदने पर भारत की आलोचना होती रही है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बयान?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है।

रूस से सस्ता तेल मिलने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें काबू में रखने में मदद मिली।

ऊर्जा डाइवर्सिफिकेशन की रणनीति से भारत ने मध्य पूर्व, रूस, अफ्रीका और अब लैटिन अमेरिका तक स्रोत बढ़ाए हैं।

यह बयान ट्रंप प्रशासन के आने के बाद अमेरिका से संभावित नए दबाव की तैयारी भी दिखाता है।

सरकार का संदेश साफ है—ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय हित है, राजनीति नहीं। फैंस और एनालिस्ट्स इसे भारत की कूटनीतिक मजबूती का संकेत मान रहे हैं।

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