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मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटाया गया… गृह मंत्रालय ने जारी किया नोटिफिकेशन, अब नई सरकार का रास्ता साफ!

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटाया गया… गृह मंत्रालय ने जारी किया नोटिफिकेशन, अब नई सरकार का रास्ता साफ!

केंद्र सरकार ने मणिपुर में लगभग एक साल से चले आ रहे राष्ट्रपति शासन को समाप्त करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। गृह मंत्रालय ने मंगलवार को नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें कहा गया है कि 4 फरवरी 2026 से राष्ट्रपति शासन हटाया जा रहा है। यह फैसला राज्य में राजनीतिक स्थिरता लाने और नई सरकार गठन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

कब और क्यों लगा था राष्ट्रपति शासन?

राष्ट्रपति शासन 13 फरवरी 2025 को लागू किया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राज्य में मैतेई-कुकी जातीय हिंसा भड़क उठी थी। हिंसा में हजारों प्रभावित हुए, हजारों विस्थापित हुए और सैकड़ों मौतें हुईं। विधानसभा को निलंबित (सस्पेंडेड एनिमेशन) रखा गया था। संसद ने इसे कई बार बढ़ाया था—आखिरी एक्सटेंशन फरवरी 2026 तक था, लेकिन अब केंद्र ने इसे हटाने का फैसला लिया है।

नोटिफिकेशन की मुख्य बातें

राष्ट्रपति शासन तत्काल प्रभाव से समाप्त।

60 सदस्यीय विधानसभा फिर से सक्रिय होगी।

राज्यपाल अजय कुमार भल्ला अब सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू करेंगे।

गृह मंत्रालय ने कहा कि स्थिति में सुधार और राजनीतिक सहमति के आधार पर यह फैसला लिया गया।

सरकार गठन की तैयारी

राष्ट्रपति शासन हटते ही बीजेपी ने तेजी दिखाई। एनडीए विधायक दल के नेता वाई. खेमचंद सिंह (युमनाम खेमचंद सिंह) ने बुधवार को राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। खेमचंद को बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया है। वे मैतेई समुदाय से हैं। पार्टी जातीय संतुलन बनाने की कोशिश में है—कुकी और नागा समुदायों से डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं (जैसे नेमचा किपगेन और लोसी डिक्हो)।

बीजेपी के पास 37 विधायक हैं, जो बहुमत (31) से ज्यादा हैं। एनडीए सहयोगी भी साथ हैं। हालांकि, कुकी संगठन अलग प्रशासन की मांग पर अड़े हैं। केंद्र कुकी-मैतेई के बीच बातचीत कर रहा है।

क्या चुनौतियां हैं?

जातीय तनाव अभी भी बना हुआ है।

कुकी समुदाय अलग यूनियन टेरिटरी की मांग कर रहा है।

हिंसा दोबारा भड़कने का खतरा।

लेकिन केंद्र का मानना है कि लोकप्रिय सरकार से स्थिति बेहतर होगी।

यह फैसला मणिपुर में शांति बहाली और राजनीतिक प्रक्रिया की बहाली का संकेत है। विधानसभा 2027 तक चलेगी। क्या नई सरकार हिंसा को रोक पाएगी? समय बताएगा, लेकिन राष्ट्रपति शासन का अंत राज्य के लिए राहत की खबर है।

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