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गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड केस: मोबाइल खंगाल रही पुलिस… अब तक क्या-क्या पता चला, पूरी कहानी समझिए

गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड केस: मोबाइल खंगाल रही पुलिस… अब तक क्या-क्या पता चला, पूरी कहानी समझिए

गाजियाबाद, 4 फरवरी 2026 — उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक पॉश सोसाइटी में तीन सगी नाबालिग बहनों की मौत ने पूरे देश को हिला दिया है। टीला मोड़ थाना क्षेत्र की भारत सिटी सोसाइटी (टावर B-1, फ्लैट 907) की 9वीं मंजिल से मंगलवार रात करीब 2:15 बजे तीनों बहनें कूद गईं। तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक बहनों की पहचान विशिका (16 साल), प्राची (14 साल) और पाखी (12 साल) के रूप में हुई है। ये तीनों चेतन कुमार (शेयर/फॉरेक्स ट्रेडर) की बेटियां थीं।

घटना कैसे हुई?

पुलिस के अनुसार, तीनों बहनें रात में अपने कमरे से निकलीं और पूजा रूम (टेम्पल रूम) में गईं। उन्होंने दरवाजा अंदर से बंद किया, फिर कुर्सी/स्टूल रखकर खिड़की से एक-एक करके कूद गईं। बालकनी या खिड़की से कूदते समय वे एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए थीं। पड़ोसी अरुण सिंह (चश्मदीद) ने बताया कि एक बहन कूदने वाली थी, बाकी दो उसे रोक रही थीं, लेकिन तीनों गिर पड़ीं। यह सुनकर परिवार और सोसाइटी के लोग नीचे पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। शवों को लोनी के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम हो चुका है।

पुलिस को क्या-क्या मिला?

सुसाइड नोट: एक पेज का नोट मिला, जिसमें सिर्फ “मम्मी-पापा सॉरी” लिखा था। कुछ रिपोर्ट्स में 8 पेज का नोट बताया गया, जिसमें “ट्रू लाइफ स्टोरी… रीड नाउ” लिखा था, साथ में आंसू वाले इमोजी और माफी के शब्द।

डायरी और दीवार पर लिखावट: डायरी के कई पन्नों पर “कोरिया हमारी जिंदगी है”, “सॉरी पापा”, कोरियन नामों से संबोधन और भावुक संदेश मिले। दीवार पर “माई लाइफ इज वेरी वेरी अलोन”, “आई एम वेरी अलोन”, “मेक मी अ हार्ट ऑफ ब्रोकन” जैसे शब्द लिखे थे।

कोरियन नामों का इस्तेमाल: तीनों बहनें एक-दूसरे को कोरियन नामों से बुलाती थीं।

ऑनलाइन गेमिंग का एंगल

पिता चेतन कुमार का दावा है कि तीनों बहनें कोरोना काल से मोबाइल गेमिंग की लत में फंस गई थीं। वे एक टास्क-बेस्ड कोरियन लवर गेम (Korean Lover Game या इसी तरह का) खेलती थीं, जिसमें 50 टास्क थे। आखिरी टास्क में कथित तौर पर खुद को नुकसान पहुंचाने या मौत जैसा चैलेंज था। पिता ने हाल ही में गेम पर रोक लगाई थी, जिससे बहनें नाराज थीं। उन्होंने कहा, “वे गेम नहीं छोड़ पाती थीं, स्कूल भी रेगुलर नहीं जाती थीं।”

पुलिस ने तीनों के मोबाइल फोन जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिए हैं। ACP (शालीमार गार्डन) अतुल कुमार सिंह और डीसीपी निमिष पाटिल ने कहा, “हम हर एंगल से जांच कर रहे हैं—गेम की लत, पारिवारिक दबाव, मानसिक स्वास्थ्य। अभी गेम के टास्क या बाहरी प्रभाव का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है। फॉरेंसिक रिपोर्ट से साफ होगा कि आखिरी समय में वे किस कंटेंट से जुड़ी थीं।”

परिवार की पृष्ठभूमि

पिता की दो पत्नियां हैं (दोनों बहनें), कुल 5 बच्चे। तीनों बहनें अलग-अलग माताओं से थीं, लेकिन एक ही घर में रहती थीं। परिवार ने बताया कि बहनें कोरोना के बाद से गेम में डूबी रहीं, पढ़ाई छोड़ दी और परिवार से अलग-थलग हो गईं।

पुलिस की जांच के मुख्य बिंदु

मोबाइल फॉरेंसिक: गेम का नाम, टास्क डिटेल्स, चैट या बाहरी संपर्क की जांच।

सुसाइड नोट और डायरी की हैंडराइटिंग/फॉरेंसिक जांच।

परिवार के सदस्यों से पूछताछ।

क्या यह सुसाइड था या दुर्घटना (रोकते-रोकते गिरना)?

क्या कोई बाहरी व्यक्ति/ऑनलाइन ग्रूमिंग शामिल था?

यह मामला ऑनलाइन गेमिंग एडिक्शन और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के खतरे को फिर उजागर कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे टास्क-बेस्ड गेम (ब्लू व्हेल, मोमो जैसे) बच्चों को डिप्रेशन और आत्मघाती विचारों की ओर धकेल सकते हैं। पुलिस जांच जारी है—फॉरेंसिक रिपोर्ट आने पर ही असली वजह साफ होगी।

यह घटना माता-पिता के लिए बड़ी चेतावनी है—बच्चों की स्क्रीन टाइम पर नजर रखें, बातचीत बढ़ाएं, मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें। ऐसी त्रासदी रोकने के लिए समाज और सरकार दोनों को जागरूक होना होगा।

(यह न्यूज विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस बयानों पर आधारित है। जांच अभी चल रही है, कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला।)

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