साध्वी प्रेम बाईसा: बाल साध्वी से कथावाचक तक का सफर, वायरल वीडियो विवाद से मौत की गुत्थी तक
साध्वी प्रेम बाईसा: बाल साध्वी से कथावाचक तक का सफर, वायरल वीडियो विवाद से मौत की गुत्थी तक
राजस्थान की प्रसिद्ध कथावाचक और बाल साध्वी साध्वी प्रेम बाईसा (उम्र 23 वर्ष) की 28 जनवरी 2026 को जोधपुर के बोरानाडा इलाके स्थित साधना कुटीर आश्रम में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनकी मौत ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है। मौत के कारणों पर सवाल उठ रहे हैं – क्या यह हादसा था, आत्महत्या, या कोई साजिश? पुलिस जांच में जुटी है, जबकि उनके अनुयायी और RLP नेता हनुमान बेनीवाल CBI जांच की मांग कर रहे हैं।
कौन थीं साध्वी प्रेम बाईसा?
साध्वी प्रेम बाईसा का जन्म राजस्थान के बालोतरा जिले (पूर्व में बाड़मेर) के परेऊ गांव में हुआ। उनके पिता विरमनाथ (वीरमनाथ) पेशे से ट्रक ड्राइवर थे, जबकि मां अमरू बाईसा साधारण गृहणी और भक्ति से जुड़ी हुई थीं। मात्र 2 साल की उम्र में मां की मौत के बाद प्रेम बाईसा का बचपन आध्यात्मिक माहौल में बीता। पिता ने उन्हें जोधपुर के गुरुकृपा आश्रम में राजाराम जी महाराज और संत कृपाराम जी महाराज के सान्निध्य में रखा। यहां उन्होंने भजन गायन, कथा वाचन और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया।
12 साल की छोटी उम्र में उन्होंने अपनी पहली श्रीमद् भागवत कथा सुनाई। बाद में वे गुरुकृपा आश्रम से अलग होकर जोधपुर के पाल रोड के पास साधना कुटीर आश्रम में रहने लगीं। उनकी मीठी आवाज में भजन और कथाएं पश्चिमी राजस्थान (जोधपुर, बाड़मेर, बालोतरा) में लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती थीं। वे सनातन धर्म, भक्ति, नैतिकता और परिवारिक मूल्यों पर जोर देती थीं। उनके यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया पर भजन-कथाएं लाखों व्यूज पाती थीं।
आध्यात्म से गहरा लगाव और जीवन
मां की मौत के बाद प्रेम बाईसा ने बचपन से ही संन्यासी जीवन अपनाया। वे पिता विरमनाथ को ‘गुरु’ मानती थीं और उनके साथ आश्रम में रहकर धार्मिक कार्य करती थीं। वे भागवत कथा, भजन और प्रवचनों के माध्यम से सनातन संस्कृति का प्रचार करती थीं। उनके अनुयायी उन्हें ‘बाल साध्वी’ कहकर पुकारते थे। वे समाज सुधार और भक्ति पर फोकस करती थीं।
विवाद और वायरल वीडियो
पिछले साल जुलाई 2025 में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें साध्वी प्रेम बाईसा को उनके पिता (गुरु) के साथ गले लगते या गोद में उठाए दिखाया गया। इसे गलत संदर्भ में पेश किया गया, जिससे ट्रोलिंग और मानसिक प्रताड़ना शुरू हो गई। साध्वी ने इसे ‘एडिटेड’ और ‘साजिश’ बताया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से ‘अग्निपरीक्षा’ देने की बात कही और कहा कि वे खुद को निर्दोष साबित करेंगी। एक आरोपी को गिरफ्तार भी किया गया था, लेकिन जमानत पर रिहा होने के बाद वीडियो फिर वायरल हुआ। साध्वी तनाव में थीं और न्याय की गुहार लगा रही थीं।
मौत की गुत्थी
28 जनवरी शाम को आश्रम में उनकी तबीयत बिगड़ी। पिता और एक सहयोगी उन्हें प्रेक्षा अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने ‘ब्रॉट डेड’ (मृत अवस्था में लाया गया) घोषित किया। मौत के करीब 4 घंटे बाद (रात 9:30 बजे) उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट आया: “जीते जी नहीं, जाने के बाद मिलेगा न्याय।” इसमें ‘अग्निपरीक्षा’, ‘अलविदा’ और न्याय का जिक्र था। यह पोस्ट सुसाइड नोट जैसा लग रहा है, लेकिन मौत के बाद अपलोड होने से सवाल उठे – क्या प्री-शेड्यूल्ड था या किसी ने डाला?
पिता का दावा: गलत इंजेक्शन (डेक्सोना) लगने से मौत हुई। पुलिस ने कंपाउंडर को हिरासत में लिया, इंजेक्शन जब्त किया, आश्रम सील किया। पोस्टमॉर्टम में मेडिकल बोर्ड ने जांच की। भक्त पिता और आश्रम पर आरोप लगा रहे हैं, जबकि कुछ इसे सोशल मीडिया ट्रोलिंग का नतीजा बता रहे हैं।
साध्वी प्रेम बाईसा की मौत ने आध्यात्मिक जगत को झकझोर दिया है। जांच जारी है, अंतिम संस्कार परेऊ गांव में होना है। उनकी यादें भजनों और कथाओं में जिंदा रहेंगी, लेकिन मौत का रहस्य अभी अनसुलझा है।
