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अंतरिक्ष की उड़ान को कर्तव्य पथ पर सम्मान: शुभांशु शुक्ला को मिला अशोक चक्र – गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार दिखा ऐतिहासिक क्षण

अंतरिक्ष की उड़ान को कर्तव्य पथ पर सम्मान: शुभांशु शुक्ला को मिला अशोक चक्र – गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार दिखा ऐतिहासिक क्षण

77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर जब ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अशोक चक्र प्राप्त करने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री के रूप में परेड में हिस्सा लिया, तो पूरे देश में गर्व की लहर दौड़ गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया, जो भारत का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। यह पुरस्कार उन्हें Axiom Mission 4 (Ax-4) में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर पहुंचने और वहां 18 दिनों तक वैज्ञानिक अनुसंधान करने के लिए दिया गया है।

शुभांशु शुक्ला की उपलब्धियां और अशोक चक्र क्यों?

पहले भारतीय जो ISS पर पहुंचे और वहां 60+ वैज्ञानिक प्रयोग पूरे किए।

प्रयोगों में शामिल: माइक्रोग्रैविटी में पेशियों के क्षय पर रिसर्च, मेथी उगाना, स्क्रीन टाइम का प्रभाव, और भविष्य के गगनयान मिशन के लिए महत्वपूर्ण अध्ययन।

यह मिशन NASA, Axiom Space और ISRO के सहयोग से हुआ था।

शुभांशु ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में असाधारण साहस, दृढ़ता और राष्ट्र सेवा दिखाई, जिसके लिए उन्हें अशोक चक्र से नवाजा गया।

यह पुरस्कार 26 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति भवन में प्रदान किया गया, और परेड में वे भारतीय वायुसेना की टुकड़ी के साथ शामिल हुए।

परेड में शुभांशु का ऐतिहासिक क्षण:

कर्तव्य पथ पर अशोक चक्र प्राप्तकर्ताओं की टुकड़ी में शुभांशु ने वायुसेना यूनिफॉर्म में मार्च किया।

उनके साथ अन्य वीरों ने भी परेड में हिस्सा लिया, लेकिन शुभांशु का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।

दर्शकों ने उन्हें “अंतरिक्ष के योद्धा” कहा और तालियां बजाईं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर लिखा: “शुभांशु शुक्ला जी का अशोक चक्र भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा है।”

शुभांशु शुक्ला का यह सम्मान न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय है। 1984 में राकेश शर्मा के बाद वे पहले ऐसे भारतीय हैं जिन्होंने ISS पर पहुंचकर इतिहास रचा, और अब देश ने उन्हें वीरता के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा है।

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