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ब्रह्मोस की दहाड़ ने फिर दिखाई ताकत: गणतंत्र दिवस परेड में सुपरसोनिक मिसाइल ने पाकिस्तान को फिर दहला दिया

ब्रह्मोस की दहाड़ ने फिर दिखाई ताकत: गणतंत्र दिवस परेड में सुपरसोनिक मिसाइल ने पाकिस्तान को फिर दहला दिया

77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर जब ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की टुकड़ी ने मार्च किया, तो पूरी दुनिया की नजरें उस पर टिक गईं। यह मिसाइल भारत की सबसे तेज और घातक हथियार प्रणालियों में से एक है, जिसकी रफ्तार मच 3 (ध्वनि की गति से 3 गुना तेज) है – यानी 3700 किमी/घंटा से ज्यादा। पाकिस्तान के लिए यह मिसाइल हमेशा से “खौफ का नाम” रही है, और आज फिर परेड में इसकी धाक ने सबको प्रभावित कर दिया।

ब्रह्मोस परेड में क्यों खास थी?

टेब्लो का थीम: “आत्मनिर्भर भारत: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता”। ब्रह्मोस को मुख्य आकर्षण बनाया गया, जिसमें लॉन्चर व्हीकल पर मिसाइल मॉडल्स और सुपरसोनिक टेक्नोलॉजी की झलक दिखाई गई।

मिसाइल की क्षमता:

रेंज: 290-800 किमी (एक्सटेंडेड रेंज वर्जन)

स्पीड: मच 2.8-3.0

लक्ष्य: जमीन, जहाज और हवाई लक्ष्य

भारत-रूस संयुक्त उत्पादन, DRDO और NPO Mashinostroyeniya की देन

पाकिस्तान पर असर: 2019 में बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने ब्रह्मोस की रेंज और स्पीड से डरते हुए अपनी एयर डिफेंस सिस्टम्स को अपग्रेड करने की कोशिश की, लेकिन ब्रह्मोस की “फायर एंड फॉरगेट” क्षमता अभी भी पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा मानी जाती है।

परेड में ब्रह्मोस की झलक:

कई वेरिएंट दिखाए गए: लैंड-बेस्ड, शिप-लॉन्च्ड और एयर-लॉन्च्ड (Su-30 MKI से लॉन्च होने वाला)।

DRDO के वैज्ञानिकों और भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना के जवानों ने ब्रह्मोस टुकड़ी का नेतृत्व किया।

परेड में ब्रह्मोस के साथ अग्नि-5, पृथ्वी, अस्त्र जैसी अन्य मिसाइलें भी शामिल थीं, लेकिन ब्रह्मोस की स्पीड और सटीकता ने सबसे ज्यादा तालियां बटोरीं।

दर्शकों ने इसे “पाकिस्तान के लिए चेतावनी” और “भारत की ताकत” बताया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ब्रह्मोस टुकड़ी को विशेष तारीफ दी। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा: “ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई दे रही हैं।”

गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में ब्रह्मोस ने फिर साबित कर दिया कि भारत की रक्षा ताकत अब दुनिया के टॉप लेवल पर है। पाकिस्तान के लिए यह “दहाड़” आज भी वही पुरानी वाली है – तेज, घातक और अजेय!

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