ट्रंप की धमकी से BRICS में तनाव: साउथ अफ्रीका ने ईरान को नौसैनिक अभ्यास से हटने को कहा, क्या पड़ेगी दरार?
ट्रंप की धमकी से BRICS में तनाव: साउथ अफ्रीका ने ईरान को नौसैनिक अभ्यास से हटने को कहा, क्या पड़ेगी दरार?
केप टाउन, 14 जनवरी 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘ट्रेड टैरिफ’ की धमकी ने BRICS देशों के बीच दरार डालने की कोशिश की है। साउथ अफ्रीका द्वारा होस्ट किए जा रहे ‘विल फॉर पीस 2026’ नौसैनिक अभ्यास में ईरान की भागीदारी पर दबाव बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, साउथ अफ्रीका ने ईरान से अपने जहाजों को वापस लेने और सिर्फ ऑब्जर्वर का दर्जा लेने की अपील की है, ताकि अमेरिका से रिश्ते बिगड़ने से बचा जा सके। यह फैसला BRICS प्लस देशों (ब्राजील, रूस, इंडिया, चाइना, साउथ अफ्रीका, ईरान आदि) के बीच एकता पर सवाल उठा रहा है।
अभ्यास का पृष्ठभूमि: BRICS प्लस का शक्ति प्रदर्शन
‘विल फॉर पीस 2026’ अभ्यास 9 से 16 जनवरी तक साइमंस टाउन नेवल बेस के पास चल रहा है, जिसमें चाइना, रूस और ईरान के युद्धपोत शामिल हैं। साउथ अफ्रीका का कहना है कि यह अभ्यास समुद्री सुरक्षा, एंटी-पाइरेसी और आतंकवाद विरोधी ऑपरेशंस पर फोकस है, जो वैश्विक व्यापार मार्गों की रक्षा के लिए जरूरी है। हालांकि, ट्रंप ने इसे ‘एंटी-अमेरिकन’ करार दिया है और BRICS देशों पर 10% अतिरिक्त ट्रेड टैरिफ लगाने की धमकी दी है। साउथ अफ्रीका के लिए यह चुनौती इसलिए बड़ी है क्योंकि उसका अमेरिका के साथ अफ्रीकन ग्रोथ एंड ऑपर्च्युनिटी एक्ट (AGOA) के तहत विशेष व्यापार समझौता खत्म हो चुका है, और नया समझौता कांग्रेस में अटका है।
ट्रंप फैक्टर: दबाव की राजनीति
ट्रंप प्रशासन ने BRICS प्लस को ‘एंटी-अमेरिकन पॉलिसी’ वाला गठबंधन बताया है। पिछले साल जनवरी में ट्रंप ने सभी BRICS सदस्यों पर टैरिफ की चेतावनी दी थी, जो अब ईरान की भागीदारी से और तीखी हो गई है। साउथ अफ्रीका की सत्तारूढ़ पार्टी ANC के डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर बांतु होलोमिसा ने कहा, “यह कोई बड़ी बात नहीं है,” लेकिन विपक्षी डेमोक्रेटिक अलायंस ने सरकार की आलोचना की है कि यह नॉन-एलाइंड पॉलिसी से भटक रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की धमकी से साउथ अफ्रीका फंस गया है, क्योंकि BRICS से पीछे हटना गठबंधन की एकता को कमजोर करेगा, जबकि अमेरिका से टकराव आर्थिक नुकसान पहुंचाएगा।
ईरान पर दबाव: ऑब्जर्वर बनने की अपील
साउथ अफ्रीका ने ईरान से कहा है कि वह अपने जहाजों को वापस ले ले और अभ्यास में सिर्फ ऑब्जर्वर के रूप में शामिल हो। ईरान ने अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया, लेकिन BRICS में उसकी हालिया एंट्री (2024) के बाद यह पहला बड़ा मिलिट्री कोऑपरेशन है। अगर ईरान पीछे हटा, तो यह BRICS की मिलिट्री एकता पर सवाल उठाएगा, खासकर जब रूस और चाइना ट्रंप की आलोचना कर रहे हैं।
BRICS का भविष्य: दरार या मजबूती?
यह घटना BRICS प्लस के विस्तार (ईरान, मिस्र, यूएई आदि शामिल) के बाद पहली बड़ी चुनौती है। इंडिया और ब्राजील जैसे देश नॉन-एलाइंड रहते हुए अमेरिका से रिश्ते बनाए रखना चाहते हैं, जबकि रूस और चाइना ट्रंप की नीतियों का विरोध कर रहे हैं। यदि साउथ अफ्रीका ईरान को बाहर करता है, तो यह गठबंधन में दरार पैदा कर सकता है, लेकिन अगर अभ्यास जारी रहा, तो ट्रंप की तरफ से नए प्रतिबंध आ सकते हैं। दुनिया की नजरें अब अभ्यास के नतीजे पर टिकी हैं—क्या BRICS एकजुट रहेगा या ट्रंप फैक्टर से बिखरेगा?
