हल्द्वानी: इन्फ्लुएंसर ज्योति अधिकारी को मिली सशर्त जमानत, 5 दिन जेल में रहने के बाद कोर्ट से राहत
हल्द्वानी: इन्फ्लुएंसर ज्योति अधिकारी को मिली सशर्त जमानत, 5 दिन जेल में रहने के बाद कोर्ट से राहत
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति अधिकारी को आखिरकार जमानत मिल गई है। हल्द्वानी की एसीजे कोर्ट द्वितीय ने मंगलवार को उनकी सशर्त जमानत मंजूर कर दी। ज्योति अधिकारी पिछले 5 दिनों से नैनीताल जेल में बंद थीं। कोर्ट ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया है, जिसमें सोशल मीडिया पर कोई विवादित पोस्ट न करने और जांच में सहयोग करने की शर्त शामिल है।
क्या था मामला?
ज्योति अधिकारी पर उत्तराखंड की देवी-देवताओं और कुमाऊं की महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा था।
उन्होंने एक वीडियो में कथित तौर पर कुमाऊंनी महिलाओं को अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया और ‘दरांती’ लहराते हुए धमकी भरे अंदाज में बात की, जिससे सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश फैला।
उत्तराखंड में कई संगठनों और स्थानीय लोगों ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसमें धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और महिलाओं की गरिमा का अपमान करने के आरोप थे।
पुलिस ने धारा 153A (धार्मिक भावनाएं भड़काना), 295A (धार्मिक भावनाओं को ठेस), 504 (जानबूझकर अपमान), 506 (आपराधिक धमकी) और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया था।
8 जनवरी को ज्योति अधिकारी को गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद से वे जेल में थीं।
कोर्ट में क्या हुआ?
ज्योति अधिकारी की ओर से वकीलों ने जमानत याचिका दायर की, जिसमें कहा गया कि वे सिर्फ अपनी राय व्यक्त कर रही थीं और कोई गंभीर अपराध नहीं किया।
अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध किया, लेकिन कोर्ट ने सशर्त जमानत मंजूर कर दी।
जमानत की शर्तें:
जांच में पूर्ण सहयोग करना।
सोशल मीडिया पर कोई विवादित या आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट न करना।
कोर्ट की अनुमति के बिना उत्तराखंड से बाहर न जाना।
हर 15 दिन में थाने में हाजिरी देना।
सोशल मीडिया पर मिक्स्ड रिएक्शन
कुछ लोगों ने जमानत को सही ठहराया और कहा कि यह अभिव्यक्ति की आजादी का मामला है।
वहीं, कुमाऊं और उत्तराखंड के कई संगठनों ने नाराजगी जताई और कहा कि ऐसे बयानों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
ज्योति अधिकारी के कुछ फॉलोअर्स ने उन्हें सपोर्ट किया, जबकि विरोधियों ने कहा कि जमानत मिलने से महिलाओं और स्थानीय संस्कृति का अपमान बढ़ावा मिलेगा।
ज्योति अधिकारी अब बाहर हैं, लेकिन मामला कोर्ट में चलता रहेगा। क्या आपको लगता है जमानत सही फैसला था या सख्त सजा होनी चाहिए थी? कमेंट्स में बताएं!
