रामनगर में कोसी नदी विवाद: सैकड़ों मजदूरों का हंगामा, मशीनों से उपखनिज भरान पर बेरोजगारी का रोना, प्रशासन पर अवैध खनन का आरोप
रामनगर में कोसी नदी विवाद: सैकड़ों मजदूरों का हंगामा, मशीनों से उपखनिज भरान पर बेरोजगारी का रोना, प्रशासन पर अवैध खनन का आरोप
उत्तराखंड के रामनगर क्षेत्र में कोसी नदी के किनारे आज बड़ा हंगामा मचा। हजारों की संख्या में बाहर से आए मजदूरों ने कोसी नदी में उपखनिज (रेत-बजरी) भरान कार्य के लिए भारी मशीनों के इस्तेमाल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। मजदूरों ने सरकार, जिला प्रशासन और खनन माफिया पर अवैध मशीनरी चलाने का गंभीर आरोप लगाया, जिससे उनका पारंपरिक मैन्युअल काम पूरी तरह छिन गया है। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की, “हमारा रोजगार लौटाओ”, “मशीन बंद करो, मजदूर बचाओ” जैसे स्लोगन लगाए।
मजदूरों की मुख्य शिकायतें
हर साल कोसी नदी में मैन्युअल तरीके से रेत-बजरी निकालकर वाहनों में भरने का काम करते हैं, जिससे परिवार चलता है।
इस साल नदी में जेसीबी, पोकलेन जैसी भारी मशीनें चल रही हैं, जिससे हाथ से काम करने वाले मजदूरों को कोई काम नहीं मिल रहा।
मजदूरों ने बताया कि काम की उम्मीद में उन्होंने हजारों रुपये खर्च कर परात, बेलचे, गट्टे और अन्य औजार खरीदे थे, लेकिन मशीनों के कारण काम ही नहीं मिला।
अब वे बिना कमाई के घर लौटने को मजबूर हैं, जिससे भुखमरी की स्थिति बन गई है।
सामाजिक कार्यकर्ता देव बिष्ट ने बताया कि हर साल 50 हजार से 1 लाख तक मजदूर इस मौसमी काम के लिए रामनगर आते हैं। इस बार मशीनों के चलते सभी बेरोजगार हो गए हैं।
प्रदर्शन का दृश्य
मजदूर रामनगर के विभिन्न पुलों और नदी किनारे पर जमा हुए। कई महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मशीनों को तुरंत रोककर उन्हें मैन्युअल काम दिया जाए। मजदूरों का कहना है कि मशीनों से काम होने पर नदी का पर्यावरण भी प्रभावित हो रहा है और अवैध खनन को बढ़ावा मिल रहा है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
रामनगर एसडीएम और पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शन की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर बातचीत शुरू की।
मजदूरों को आश्वासन दिया गया कि मामले की जांच की जाएगी और अवैध मशीनरी के इस्तेमाल पर सख्त कार्रवाई होगी।
जिला प्रशासन ने कहा कि कोसी नदी में खनन गतिविधियां नियमों के अनुसार ही होनी चाहिए। अगर कोई अवैध मशीनरी चल रही है, तो तुरंत जब्त की जाएगी।
हालांकि, मजदूरों का कहना है कि जब तक मशीनें पूरी तरह बंद नहीं होतीं और उन्हें काम नहीं मिलता, वे आंदोलन जारी रखेंगे।
यह विवाद उत्तराखंड में मौसमी मजदूरों के रोजगार और अवैध खनन के बीच टकराव को उजागर करता है। पिछले साल भी इसी तरह की शिकायतें आई थीं, लेकिन इस बार प्रदर्शन की तीव्रता ज्यादा है। क्या सरकार मजदूरों की मांगें मानेगी या मशीनों को अनुमति देगी? अपडेट्स के लिए नजर रखें। क्या आपको लगता है मैन्युअल काम को बचाना चाहिए या मशीनरी से तेज काम बेहतर है? कमेंट्स में बताएं!
