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क्यूबा ने Maduro की रक्षा में खोए 32 सैनिक: US हमले में हार, अब ट्रंप की धमकी – ‘कम्युनिस्ट शासन गिरने वाला है’!

क्यूबा ने Maduro की रक्षा में खोए 32 सैनिक: US हमले में हार, अब ट्रंप की धमकी – ‘कम्युनिस्ट शासन गिरने वाला है’!

वॉशिंगटन/हवाना: वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को बचाने के लिए क्यूबा ने अपनी सेना भेजी थी, लेकिन अमेरिकी हमले में उसे बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक, मादुरो की सुरक्षा में तैनात क्यूबाई सैनिकों में से कम से कम 32 की मौत हो गई। यह खुलासा ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा के कम्युनिस्ट शासन को सीधी धमकी दी है, कहा – “यह शासन खुद-ब-खुद गिरने वाला है।” ट्रंप ने आगे सैन्य कार्रवाई की भी चेतावनी दी है।

क्या हुआ था घटनाक्रम?

3 जनवरी 2026 को अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर बड़ा हमला किया, जिसमें मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को गिरफ्तार कर लिया गया।

मादुरो की सुरक्षा में क्यूबा के सैनिक और सलाहकार तैनात थे, जो दशकों से वेनेजुएला के साथ कम्युनिस्ट विचारधारा में बंधे हैं। क्यूबा वेनेजुएला से तेल और आर्थिक मदद लेता रहा है।

हमले में वेनेजुएला के कम से कम 40 सैनिक और नागरिक मारे गए, लेकिन ट्रंप ने खासतौर पर क्यूबाई सैनिकों की मौत का जिक्र किया। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि मादुरो की रक्षा में “कई क्यूबाई” मारे गए, जबकि एक अनऑफिशियल रिपोर्ट में यह संख्या 32 बताई जा रही है।

ट्रंप ने कहा, “कई क्यूबाई अपनी जान गंवा बैठे, जो मादुरो की रक्षा कर रहे थे। यह अच्छा कदम नहीं था।” उन्होंने क्यूबा की आर्थिक बदहाली का जिक्र करते हुए कहा कि कोई सैन्य कार्रवाई की जरूरत नहीं, शासन खुद गिर जाएगा।

ट्रंप का निशाना क्यों क्यूबा? ट्रंप ने मादुरो की गिरफ्तारी को “न्याय की जीत” बताया और वेनेजुएला में अमेरिकी तेल कंपनियों की वापसी का ऐलान किया। लेकिन उनका गुस्सा क्यूबा पर ज्यादा है, क्योंकि हवाना ने मादुरो को सैन्य और सलाहकारी मदद दी थी। ट्रंप ने कोलंबिया और मैक्सिको को भी धमकी दी, लेकिन क्यूबा को “पतन के कगार पर” बताया। क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने इसे “अमेरिकी साम्राज्यवाद” करार दिया और मादुरो की रिहाई की मांग की।

इतिहास में अमेरिकी हस्तक्षेप यह घटना लैटिन अमेरिका में अमेरिकी हस्तक्षेप की लंबी कड़ी है। 1965 में डोमिनिकन रिपब्लिक में कम्युनिस्ट खतरे के नाम पर अमेरिका ने सेना भेजी थी। अब ट्रंप की नीति से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि क्यूबा की अर्थव्यवस्था पहले से संकट में है, और अगर अमेरिका दबाव बढ़ाएगा तो शासन गिर सकता है।

यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर रहा है। चीन ने भी अमेरिकी कार्रवाई की निंदा की है। क्या ट्रंप का अगला निशाना क्यूबा होगा? दुनिया की नजरें अब ट्रंप के अगले कदम पर टिकी हैं!

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