Wednesday, September 9, 2026
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‘मुस्लिम उम्मीदवार नहीं चाहिए’: अशोक चव्हाण के कथित ऑडियो क्लिप पर मचा बवाल, नांदेड चुनाव में नया विवाद

‘मुस्लिम उम्मीदवार नहीं चाहिए’: अशोक चव्हाण के कथित ऑडियो क्लिप पर मचा बवाल, नांदेड चुनाव में नया विवाद

मुंबई/नांदेड, 3 जनवरी 2026: महाराष्ट्र के नांदेड महानगरपालिका चुनाव के बीच बीजेपी के राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण एक कथित ऑडियो क्लिप को लेकर विवादों में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल इस क्लिप में चव्हाण कथित तौर पर कहते सुनाई दे रहे हैं, “मुस्लिम उम्मीदवार नहीं चाहिए, हम सिर्फ हिंदुओं का पैनल बनाएंगे।” यह बातचीत नांदेड के प्रभाग क्रमांक 14 (इतवारा मदीनानगर) के संदर्भ में बताई जा रही है, जहां मुस्लिम बहुल आबादी है।

क्लिप में चव्हाण के साथ पूर्व राज्यमंत्री डी.पी. सावंत की भी आवाज होने का दावा है। इसमें एक कार्यकर्ता द्वारा मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट देने का प्रस्ताव रखने पर उसे ठुकराते हुए केवल हिंदू उम्मीदवारों का पैनल बनाने और चुनावी खर्च पार्टी द्वारा वहन करने का आश्वासन दिया गया है। हालांकि, कई मीडिया हाउस (जैसे एनडीटीवी और अन्य) ने स्पष्ट किया है कि वे इस ऑडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करते।

विवाद की मुख्य वजहें:

नांदेड वाघाला महानगरपालिका (NWCMC) चुनाव 15 जनवरी 2026 को होने हैं। बीजेपी पहली बार चव्हाण के नेतृत्व में पूर्ण ताकत से लड़ रही है।

प्रभाग 14 मुस्लिम बहुल इलाका है, जहां उम्मीदवार चयन पर यह बातचीत हुई बताई जा रही है।

क्लिप वायरल होने के बाद विपक्षी दल और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ ने इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाया।

इसी बीच चव्हाण पर टिकट के बदले 50 लाख रुपये लेने के अलग आरोप भी लगे हैं (पूर्व पार्षद भानुसिंह रावत द्वारा), जिसे उन्होंने खारिज किया।

दोनों पक्षों की स्थिति:

अशोक चव्हाण और बीजेपी: चव्हाण या बीजेपी की ओर से इस ऑडियो पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। टिकट विवाद पर चव्हाण ने कहा था कि उन्होंने कभी पैसे नहीं मांगे और आरोप निराधार हैं।

विपक्ष: कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार) और अन्य दलों ने इसे बीजेपी की सांप्रदायिक राजनीति का उदाहरण बताया।

अंतरराष्ट्रीय/क्षेत्रीय संदर्भ: नांदेड में मुस्लिम वोटरों की अच्छी संख्या है, जो पहले कांग्रेस के साथ थे। बीजेपी महायुति गठबंधन के साथ मजबूत स्थिति में है, लेकिन ऐसे विवाद चुनावी माहौल गरमा सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्लिप अगर साबित हुई तो चुनाव आयोग तक मामला पहुंच सकता है। फिलहाल ऑडियो की जांच नहीं हुई है और यह कथित है। चुनाव से पहले टिकट वितरण और उम्मीदवार चयन पर विवाद आम हैं, लेकिन यह सांप्रदायिक रंग ले चुका है। स्थिति पर नजरें टिकी हैं।

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