चीन में कंडोम पर टैक्स: जन्म दर बढ़ाने की नई रणनीति, 30 साल बाद पॉलिसी में बड़ा यू-टर्न
चीन में कंडोम पर टैक्स: जन्म दर बढ़ाने की नई रणनीति, 30 साल बाद पॉलिसी में बड़ा यू-टर्न
बीजिंग: चीन ने 1 जनवरी 2026 से कंडोम, बर्थ कंट्रोल पिल्स और अन्य गर्भनिरोधक उत्पादों पर 13% वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) लगा दिया है। यह बदलाव 30 साल से ज्यादा पुरानी टैक्स छूट को खत्म करता है, जो 1993 में शुरू हुई थी जब देश सख्त ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ लागू कर रहा था। अब यह कदम जनसंख्या संकट से जूझते चीन की नई नीति का हिस्सा है, जहां जन्म दर बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
क्यों बदली पॉलिसी?
चीन की आबादी लगातार घट रही है। 2024 में सिर्फ 9.54 मिलियन बच्चे पैदा हुए, जो एक दशक पहले की आधी संख्या है। कुल आबादी 1.408 बिलियन तक सिमट गई और लगातार तीसरे साल कमी दर्ज की गई। बूढ़ी होती आबादी और कमजोर वर्कफोर्स से अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। पहले ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ (1980-2015) से जनसंख्या नियंत्रित की गई, जिसमें गर्भनिरोधक सस्ते और टैक्स-फ्री रखे गए। अब तीन बच्चे तक की इजाजत है, लेकिन युवा महंगाई, नौकरी अनिश्चितता और बच्चा पालने की ऊंची लागत से शादी-बच्चों से दूर भाग रहे हैं।
नई VAT कानून (2024 में पास, 2026 से लागू) में गर्भनिरोधक को टैक्स-फ्री लिस्ट से हटाया गया, जबकि चाइल्डकेयर, मैरिज सर्विसेज और एल्डर केयर को छूट दी गई। विशेषज्ञ इसे ‘सिंबॉलिक’ कदम बता रहे हैं – गर्भनिरोधक महंगे करके जन्म को प्रोत्साहन, जबकि बच्चा पालने को सस्ता करके।
कीमत पर कितना असर?
एक बॉक्स कंडोम (40-60 युआन) पर 5-10 युआन अतिरिक्त लग सकता है। पिल्स पर भी 10-20 युआन बढ़ोतरी। कुल मिलाकर 5-10% महंगा हो सकता है, लेकिन बच्चा पालने की लागत (दुनिया में सबसे महंगी) के सामने यह नगण्य है। कई विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे जन्म दर पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।
विवाद और चिंताएं
सोशल मीडिया पर मजाक उड़ रहा है – “बच्चा पैदा करना तो दूर, अब सेक्स भी महंगा हो गया!” कुछ महिलाएं कह रही हैं कि इससे अनचाही प्रेग्नेंसी और STDs (सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज) बढ़ सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि गरीब और युवाओं के लिए गर्भनिरोधक दूर हो सकता है। विपक्ष इसे ‘महिलाओं पर बोझ’ बता रहा है।
चीन सरकार अन्य उपाय भी कर रही है – कैश हैंडआउट, लंबी मैटरनिटी लीव, चाइल्डकेयर सब्सिडी। लेकिन युवा कह रहे हैं कि असली समस्या हाउसिंग, एजुकेशन और जॉब सिक्योरिटी है। यह टैक्स बदलाव जनसंख्या नीति के बड़े शिफ्ट को दिखाता है – नियंत्रण से प्रोत्साहन तक। अब देखना यह है कि क्या इससे ‘ड्रैगन’ की घटती आबादी रुक पाएगी।
